इंदौर में नशा तेजी से बढ़ता जा रहा है। न सिर्फ रहवासी क्षेत्रों में बल्कि शैक्षणिक संस्थानों में भी नशे का व्यापार करने वालों की पैठ गहरी होती जा रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए इंदौर के हर कॉलेज में अब नशा मुक्ति समिति का गठन किया जा रहा है।
इन समितियों में विद्यार्थियों और फैकल्टी को शामिल किया जाएगा। यह समितियां कैंपस के भीतर नशे से जुड़ी गतिविधियों की निगरानी करेंगी और प्रभावित छात्रों को मुख्यधारा में वापस लाने के लिए प्रेरित करेंगी। इसके अतिरिक्त, यदि कोई बाहरी व्यक्ति परिसर में ड्रग्स बेचने की कोशिश करता है, तो समितियां इसकी सूचना तत्काल प्रशासन को देंगी। जिन संस्थानों में ऐसी समितियां पहले से मौजूद हैं, उन्हें और अधिक सक्रिय बनाया जाएगा। कलेक्टर शिवम वर्मा की अध्यक्षता में कलेक्टर कार्यालय में एनसीओआरडी (NCORD) की जिला स्तरीय महत्वपूर्ण बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक में अपर कलेक्टर रोशन राय, डीसीपी क्राइम राजेश त्रिपाठी, आबकारी सहायक आयुक्त अभिषेक तिवारी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
नशा मुक्ति के लिए विशेष कार्ययोजना
बैठक के दौरान जिले में नशा मुक्ति अभियान को अधिक व्यापक और परिणामोन्मुख बनाने के उद्देश्य से एक ठोस कार्ययोजना प्रस्तुत की गई। कलेक्टर वर्मा ने जानकारी दी कि अवैध नशे के व्यापार पर अंकुश लगाने के लिए आबकारी विभाग, पुलिस और एनसीबी के आंकड़ों का विश्लेषण कर निरंतर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन नशे के विरुद्ध मल्टी-प्रोंग रणनीति अपना रहा है।
पुनर्वास केंद्रों से लौटे युवाओं पर भी नजर रखी जाएगी
कलेक्टर ने नशीले रसायनों की बिक्री पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं को इस लत से बचाने के लिए समय-समय पर कार्यशालाएं आयोजित की जाएं। पुनर्वास केंद्रों से लौटे युवाओं की स्थिति की निरंतर जानकारी लेने और उन्हें हर संभव सहायता उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया। इस अभियान में एनजीओ और सामाजिक कार्यकर्ताओं का भी सहयोग लिया जाएगा।
जन आंदोलन के रूप में काम करने के निर्देश
बैठक में ड्रग्स बनाने में उपयोग होने वाले रासायनिक कंपाउंड्स की निगरानी पर विशेष चर्चा हुई। कलेक्टर वर्मा ने बताया कि ऐसे रसायनों को एनडीपीएस एक्ट के दायरे में लाने और उनके नियमन के लिए कानूनी प्रावधानों पर कार्य किया जाएगा। उन्होंने सभी विभागों को समन्वय के साथ कार्य करते हुए इस अभियान को एक जन आंदोलन का रूप देने के निर्देश दिए।
