इंदौर में जलसंकट से महंगाई की मार भी बढ़ने लगी है। डीजल की कीमतों में इजाफा होने के बाद शहर में पानी सप्लाई करने वाले टैंकरों के दाम भी बढ़ गए हैं। छह हजार लीटर का टैंकर, जो पहले 800 रुपये में मिल जाता था, अब 1000 से 1200 रुपये तक मिल रहा है। वहीं बड़े होटलों में पानी सप्लाई करने वाले 12 हजार लीटर के टैंकरों की कीमत में भी लगभग 1000 रुपये की बढ़ोतरी हो गई है।

 

पानी के टैंकरों की कीमतें अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद डीजल के दाम बढ़ने से बढ़ी हैं। इसका असर अब परिवारों के बजट पर भी पड़ने लगा है। शहर के कई बड़े होटल, अस्पताल, स्कूल और हॉस्टल निजी टैंकरों से पानी खरीद रहे हैं।

 

रहवासी संदीप श्रीवर्धन बताते हैं कि जिस अपार्टमेंट में वे रहते हैं, वहां की बोरिंग ने पानी देना बंद कर दिया है। इस कारण टैंकरों से पानी की व्यवस्था की जा रही है। सोसायटी ने अगले तीन महीनों के लिए मेंटेनेंस शुल्क में 1500 रुपये अतिरिक्त लेना शुरू कर दिया है।

 

भंवरकुआ क्षेत्र के एक हॉस्टल में रहने वाले छात्र अभय श्रीवास्तव ने बताया कि उनके हॉस्टल में भी पानी खरीदना पड़ रहा है, लेकिन उसका खर्च छात्रों से ही वसूला जा रहा है। इसके अलावा पानी के उपयोग पर भी सख्ती शुरू कर दी गई है।

डेढ़ हजार से ज्यादा टैंकर और ट्रैक्टर बेच रहे पानी

इंदौर में नगर निगम ने 600 से ज्यादा टैंकर किराए पर ले रखे हैं, लेकिन शहर में डेढ़ हजार से ज्यादा निजी टैंकर पानी बेच रहे हैं। इनमें ट्रैक्टर-टैंकर भी शामिल हैं। शहर के निरंजनपुर, सिरपुर और बिलावली के आसपास की बोरिंगों से ये टैंकर पानी भरकर आसपास के इलाकों में सप्लाई कर रहे हैं।

महंगे पानी का असर


  • शहर के ज्यादातर अपार्टमेंट्स में मेंटेनेंस शुल्क बढ़ गया है, क्योंकि पानी की पूर्ति टैंकर खरीदकर की जा रही है।

  • कई हॉस्टलों में शॉवर से नहाने के बजाय बाल्टी से नहाने के लिए कहा जा रहा है, ताकि पानी की बर्बादी कम हो।

  • पानी की कमी के कारण कई निर्माण कार्य रुक गए हैं, क्योंकि तराई के लिए महंगा पानी खरीदने से बजट बढ़ रहा है।



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