इंदौर में गर्मी के तेवर दिन-ब-दिन तीखे होते जा रहे हैं और शहर की जल वितरण व्यवस्था प्रभावित हो रही है। शहर के बड़े हिस्से की प्यास बुझाने वाले यशवंत सागर तालाब में 13 फीट पानी बचा हुआ है। इस तालाब से हर दिन 30 एमएलडी पानी लिया जा रहा है। देवधरम टेकरी पर फिल्टर करने के बाद इस पानी को शहर की पांच टंकियों में सप्लाई के लिए भेजा जाता है। पहले तालाब से 35 एमएलडी पानी लिया जाता था। इस तालाब की कुल क्षमता 19 फीट है।

 

शहर के आठ हजार से ज्यादा सरकारी बोरिंगों में से कई बोरिंग सूख चुके हैं, जबकि ज्यादातर बोरिंगों में पानी का स्तर कम हो गया है। यही हाल निजी बोरिंगों का भी है। इस कारण शहर में पानी की मांग बढ़ गई है। पहले कई परिवारों की पानी की जरूरत निजी बोरिंगों से पूरी हो जाती थी, लेकिन अब वे भी नर्मदा जल पर निर्भर हो गए हैं।

 

200 से ज्यादा टैंकरों से बांटा जा रहा पानी


शहर में टैंकरों की संख्या बढ़ा दी गई है। 85 वार्डों में टैंकर लगाए गए हैं। जिन वार्डों का क्षेत्रफल ज्यादा बड़ा है, वहां दो-तीन टैंकर लगाए गए हैं। इसके अलावा नगर निगम के 40 से ज्यादा सरकारी टैंकरों से भी पानी बांटा जा रहा है। इन किराए के टैंकरों पर निगम हर माह दो से तीन करोड़ रुपये खर्च कर रहा है। मई माह तक शहर में टैंकरों के माध्यम से जल वितरण जारी रहेगा।

20 प्रतिशत इलाकों में नर्मदा लाइन नहीं

शहर के 20 प्रतिशत इलाकों में अभी नर्मदा लाइन नहीं पहुंची है। वहां सबसे ज्यादा पानी की किल्लत है। शहर के सीमावर्ती इलाके इसमें शामिल हैं। बायपास और रिंग रोड की कॉलोनियों के अलावा लसूडिया क्षेत्र के इलाकों में जल संकट ज्यादा है। वहीं शहर के बाणगंगा, चंदन नगर, एरोड्रम रोड, प्रजापत नगर और अन्नपूर्णा क्षेत्र में भी नल कम दबाव से आ रहे हैं। कई इलाकों में एक दिन छोड़कर पानी दिया जा रहा है।



शहर के तालाबों की स्थिति (पानी की गहराई फीट में):


  • यशवंत सागर – 13 फीट

  • बिलावली – 10.4 फीट

  • छोटा बिलावली – 0 फीट

  • बड़ा सिरपुर – 10 फीट

  • छोटा सिरपुर – 14 फीट

  • पिपल्याहाना – 7.3 फीट



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