देश के सबसे स्वच्छ शहर का लगातार नंबर वन खिताब जीतने वाले इंदौर ने एक बार फिर स्वच्छता सर्वेक्षण में सरताज बनने की तैयारी शुरू कर दी है। इस बार स्वच्छता सर्वेक्षण में बेहतर रैंकिंग के लिए इंदौर को अपने साथ देपालपुर को भी स्वच्छ बनाना होगा। सर्वेक्षण के लिए टीमें जल्द ही विभिन्न शहरों में रवाना होंगी और वर्षा ऋतु से पहले सर्वे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
इंदौर में डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन, गार्बेज सेग्रिगेशन और डस्टबिन-फ्री सिटी जैसे सिस्टम पहले से ही अच्छी तरह काम कर रहे हैं, इसलिए अधिकारियों को इस दिशा में अधिक मेहनत नहीं करनी होगी। हालांकि, शहर को और सुंदर बनाने तथा नए मापदंडों पर अधिक अंक प्राप्त करने के लिए तैयारियां तेज कर दी गई हैं।
इस बार स्वच्छता सर्वेक्षण 2026 के नियमों में बदलाव किया गया है और कुल 12,500 अंक निर्धारित किए गए हैं। रैंकिंग सुधारने के लिए शहरों को कचरा प्रबंधन को और व्यापक बनाना होगा। अब केवल कचरा उठाने से ही रैंकिंग तय नहीं होगी, बल्कि सार्वजनिक स्थानों और सरकारी कार्यालयों की दीवारों पर पान-गुटखा के दाग, तथा पर्यटन स्थलों की गंदगी भी अंक घटा सकती है। इसे ध्यान में रखते हुए नगर निगम ने हाल ही में “नो थू-थू” अभियान शुरू किया है।
इसके अलावा, नागरिकों का फीडबैक और सर्वेक्षण टीम द्वारा शहरवासियों से ली गई जानकारी भी महत्वपूर्ण होगी। शहर के प्रमुख चौराहों की रोटरी और डिवाइडरों को रंगा जा रहा है, जबकि सार्वजनिक दीवारों पर पेंटिंग की जा रही है।
मेयर ने पार्षदों को दिए निर्देश
स्वच्छता सर्वेक्षण को ध्यान में रखते हुए नगर निगम वार्ड स्तर पर अभियान चलाएगा। इसके लिए मेयर ने महापौर परिषद की बैठक ली, जिसमें सभी पार्षदों को अपने-अपने वार्डों में जाकर स्वच्छता व्यवस्था का निरीक्षण करने और कमियों को दूर करने के निर्देश दिए गए।
बैकलेन में बढ़ी गंदगी
शहर की बैकलेन पिछले वर्ष की तुलना में अधिक गंदी हो गई हैं। स्पॉट फाइन नहीं होने के कारण कई लोग यहां कचरा फेंकने लगे हैं। इसके अलावा, कई स्थानों पर सफाईकर्मियों के अस्थायी कचरा घर बना दिए गए हैं, जहां आसपास के निवासी भी कचरा डाल रहे हैं। शहर के नालों की सफाई बनाए रखना भी एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि हर साल सफाई के बावजूद उनमें गाद जमा हो जाती है।
