दिल्ली में बने नए संसद भवन सुरक्षा, सुविधा के हिसाब से तो अच्छा है, वहां देश की कला, हस्तशिल्पों को भी प्रतिनिधित्व मिला है। यह काम संस्कृति मंत्रालय ने इंदिरा गांधी कला केंद्र को दिया था। इस केंद्र के सदस्य सच्चिदानंद जोशी इंदौर के हैं और उन्होंने संसद भवन में कला के अलग-अलग रंगों को बिखेरने में महती भूमिका निभाई।

 

उन्होंने बताया कि जब नया संसद भवन बन रहा था तो प्रधानमंत्री की इच्छा थी कि नया भवन भारतीय संस्कृति, भारतीय परंपरा और विरासत का प्रतीक हो। यह विशेष काम भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय को सौंपा गया था। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र ने यह जिम्मेदारी ली। इसका मैं सदस्य भी हूँ। हमारी कोशिश थी कि हम पूरे भवन में भारत की सनातन परंपरा, विरासत, लोक कलाओं के रंग, अलग-अलग प्रदेशों के वैभव को शामिल करें।

हम यह दिखा सकें कि भारत लोकतंत्र की जननी है। इस काम को पूरा करने के लिए हम चाहते थे कि ऐसे कलाकारों को प्रतिनिधित्व मिले, जो ज्यादा नामचीन नहीं हैं, लेकिन असाधारण प्रतिभा के धनी हैं। नए भवन में 75 फीट लंबा ब्रास का समुद्र-मंथन का म्यूरल बनाया गया।

 

भारत का शिल्प, संगीत का वैभव नए संसद भवन में नजर आता है। जोशी ने बताया कि हमने मध्य प्रदेश की अलग-अलग लोक कलाओं को दिखाया है। निर्माण प्रक्रिया में प्रदेश के लोक कलाकारों ने भाग लिया। एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि उज्जैन हमारे ज्ञान की भूमि है। उसका भी उल्लेख दर्शाई गई कला में है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि युवा कलाकार कला में भी नए प्रयोग कर रहे हैं।

थ्री-आर आधार पर आर्ट बन रहे हैं। यह जरूरी भी है। हम तमाम तरह के वेस्ट का निर्माण कर रहे हैं। बड़े शहरों में कूड़े के ढेर नजर आते हैं। कई कलाकार रीयूज़ और रिसायकल का उपयोग कला के लिए कर रहे हैं। इससे यह संदेश भी जाता है कि जिसे लोग कचरा समझ कर फेंक देते हैं, उससे कला का निर्माण हो रहा है। मुझे गर्व है कि मैं इंदौर से हूँ और इंदौर ने देश में स्वच्छता का यह संदेश दिया है कि स्वच्छता हमारे जीवन का अभिन्न अंग है। उस शुचिता का पालन हम जीवन में अलग-अलग तरीके से कर सकते हैं।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *