महाकाल मंदिर की जमीन हड़पने के आरोपों को लेकर आलोट विधायक चिंतामणि मालवीय विवादों में घिर गए हैं। इस मामले में लोकायुक्त और आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) में शिकायत दर्ज कराई गई है, वहीं मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में जनहित याचिका भी दायर की गई है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि फाइव स्टार होटल निर्माण के लिए महाकाल मंदिर की पार्किंग से जुड़ी सरकारी जमीन को निजी बताकर सौदा किया गया।
विवादित जमीन के खसरा नंबर 3664/1 और 3666/1 वर्ष 1950 तथा 1967-68 के राजस्व रिकॉर्ड में सरकारी भूमि के रूप में दर्ज बताए गए हैं। आरोप है कि बाद में रिकॉर्ड में हेरफेर कर इन्हें निजी जमीन दर्शाया गया और करोड़ों रुपए में बिक्री कर दी गई।
कांग्रेस पार्षद राजेंद्र कुवाल ने पूरे मामले की शिकायत करते हुए दावा किया है कि महाकाल मंदिर की करीब 45 हजार वर्गफीट सरकारी जमीन का रिकॉर्ड बदलकर 2 मार्च 2026 को 3.82 करोड़ रुपए में सौदा किया गया। जमीन खरीदने वाली कंपनी यूटोपिया बोटल एंड रिसॉर्ट प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर और साझेदारों में आलोट विधायक चिंतामणि मालवीय और इकबाल सिंह गांधी के नाम भी शामिल बताए गए हैं।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कमर्शियल उपयोग वाली जमीन को कृषि भूमि बताकर रजिस्ट्री कराई गई। कलेक्टर गाइडलाइन के अनुसार जमीन का मूल्य 75,400 रुपए प्रति वर्गमीटर होना चाहिए था, लेकिन रजिस्ट्री में इसे केवल 22,500 रुपए प्रति वर्गमीटर दर्शाया गया। इससे सरकार को करोड़ों रुपए के स्टांप शुल्क और पंजीयन फीस का नुकसान हुआ।
दस्तावेजों के अनुसार 4180 वर्गमीटर जमीन की वास्तविक कीमत करीब 31.51 करोड़ रुपए आंकी गई है। इस हिसाब से सरकार को लगभग 2.99 करोड़ रुपए स्टांप शुल्क और 94.55 लाख रुपए पंजीयन शुल्क मिलना चाहिए था, लेकिन केवल 40.36 लाख रुपए स्टांप ड्यूटी और 12.90 लाख रुपए रजिस्ट्रेशन फीस जमा कराई गई। शिकायतकर्ता ने इसे करोड़ों रुपए के राजस्व नुकसान का मामला बताया है।
मामले में महाकालेश्वर मंदिर प्रशासन का कहना है कि पार्किंग की जमीन से संबंधित सभी जानकारी नगर निगम के पास उपलब्ध है। वहीं विधायक चिंतामणि मालवीय ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि जमीन की रजिस्ट्री वैध दस्तावेजों के आधार पर कराई गई है।
