मध्यप्रदेश में आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारियों का आक्रोश अब खुलकर सामने आ गया है। करीब 30 हजार कर्मचारियों ने 4 मई से चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान किया है। कर्मचारियों का आरोप है कि पिछले 5 से 6 महीनों से वेतन नहीं मिला, जिससे उनका आर्थिक संकट गहरा गया है। उन्होंने सरकार के डिजिटल इंडिया दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब तकनीक की बात होती है तो वेतन समय पर क्यों नहीं दिया जा रहा। मध्य प्रदेश संविदा आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष कोमल सिंह ने साफ कहा है कि यदि मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो यह आंदोलन और उग्र होगा।

यह देरी नहीं, सुनियोजित शोषण

कर्मचारी संगठनों ने इसे सिर्फ प्रशासनिक देरी नहीं, बल्कि सुनियोजित शोषण बताया है। कोमल सिंह का कहना है कि आउटसोर्स कर्मचारियों को कम वेतन, अनियमित भुगतान और सुविधाओं की कमी का लगातार सामना करना पड़ रहा है। एनपीएस, स्वास्थ्य बीमा, अवकाश और महंगाई भत्ता का अभाव है। पिछले 5 साल से अनियमित भुगतान हो रहा है।  इन सभी मुद्दों को लेकर कर्मचारियों में गहरी नाराजगी है।

घर चलाना मुश्किल, बच्चों की पढ़ाई पर संकट

कर्मचारियों का कहना है कि महीनों से वेतन न मिलने के कारण घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। बच्चों की पढ़ाई और फीस जमा करना भी चुनौती बन गया है। उनका सवाल है कि जब कर्मचारी खुद मानसिक दबाव में होगा, तो वह मरीजों की सेवा कैसे कर पाएगा।

स्वास्थ्य सेवाओं पर असर की चेतावनी

कर्मचारी संघ ने चेतावनी दी है कि यदि हालात नहीं सुधरे तो प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि व्यवस्था चरमराती है, तो इसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।

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क्या हैं प्रमुख मांगें?

– उत्तर प्रदेश और हरियाणा की तर्ज पर निगम/मंडल का गठन

– न्यूनतम ₹26,000 वेतन लागू किया जाए

– बकाया वेतन का तत्काल भुगतान

– आउटसोर्स कर्मचारियों को मूलभूत सुविधाएं दी जाएं

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आंदोलन की पूरी रूपरेखा

4 मई: सभी जिला मुख्यालयों पर कलेक्टर को राज्यपाल के नाम ज्ञापन

18 मई: सीएमएचओ कार्यालयों पर प्रमुख सचिव के नाम ज्ञापन

25 मई: भोपाल में उपमुख्यमंत्री निवास के सामने अनिश्चितकालीन क्रमिक भूख हड़ताल

 



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