अयोध्या बायपास चौड़ीकरण परियोजना के लिए जारी पेड़ कटाई के बीच गुरुवार को राजधानी में अनोखा विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। पर्यावरण प्रेमियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कटने जा रहे हजारों पेड़ों के लिए प्रतीकात्मक शोक सभा आयोजित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। लोगों ने पेड़ों पर फूल चढ़ाए, अगरबत्तियां जलाईं और मौन रहकर हरियाली बचाने की मांग उठाई। दरअसल, अयोध्या बायपास को 10 लेन बनाने की परियोजना को हाल ही में एनजीटी से मंजूरी मिलने के बाद पेड़ कटाई का काम तेज हो गया है। रत्नागिरि तिराहे से आसाराम चौराहे तक कई स्थानों पर मशीनों के जरिए पुराने वृक्षों को हटाया जा रहा है। परियोजना के तहत कुल 7,871 पेड़ों की कटाई प्रस्तावित है, हालांकि पर्यावरणविदों का दावा है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है।

श्रद्धांजलि के बहाने शुरू हुआ नया आंदोलन
पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह केवल श्रद्धांजलि कार्यक्रम नहीं, बल्कि हरियाली बचाने के लिए जनजागरण की शुरुआत है। उनका आरोप है कि विकास कार्यों के नाम पर दशकों पुराने पेड़ों को खत्म किया जा रहा है, जबकि वैकल्पिक मॉडल अपनाकर बड़ी संख्या में पेड़ बचाए जा सकते थे। पर्यावरणविद् उमाशंकर तिवारी ने कहा कि पहले भी पेड़ों को बचाने के लिए आंदोलन किया गया था। अब कटाई दोबारा शुरू होने के बाद विरोध का नया चरण शुरू किया गया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे को लेकर और बड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
यह भी पढ़ें-हिरासत में ली गईं गिरिबाला सिंह? रात में रद्द हुई थी अग्रिम जमानत, सुबह से पूछताछ कर रही थी CBI
बायपास पर तेज हुआ निर्माण, बढ़ीं दिक्कतें
836 करोड़ रुपए की लागत वाली इस परियोजना में 16 किलोमीटर लंबे अयोध्या बायपास को सर्विस रोड सहित 10 लेन में विकसित किया जा रहा है। पेड़ कटाई के साथ-साथ निर्माण गतिविधियां भी बढ़ गई हैं। कई स्थानों पर बैरिकेडिंग और डायवर्जन बनाए गए हैं, जिससे रोजाना गुजरने वाले वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
यह भी पढ़ें-एमपी में डबल अटैक वाला मौसम, 46 जिलों में लू का असर, कई इलाकों में आंधी-बारिश बनेगी मुसीबत
हरियाली बनाम विकास की बहस फिर तेज
पर्यावरण समूहों का कहना है कि जिन पेड़ों को काटा जा रहा है, उनकी उम्र 40 से 100 साल तक है। ऐसे पेड़ों की पर्यावरणीय उपयोगिता को नए पौधे लगाकर तुरंत पूरा नहीं किया जा सकता। वहीं एनएचएआई का दावा है कि कटने वाले पेड़ों के बदले 81 हजार पौधे लगाए जाएंगे और उनकी 15 वर्षों तक देखरेख भी की जाएगी। पेड़ों को श्रद्धांजलि देने के इस अनोखे प्रदर्शन के बाद राजधानी में हरियाली और विकास के बीच संतुलन को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है।