भोपाल में ठेका, अस्थायी और आउटसोर्स कर्मचारियों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। गुरुवार को बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने नीलम पार्क क्षेत्र में रैली निकालकर प्रदर्शन किया और बाद में पार्क में धरना दिया। इस दौरान कर्मचारियों ने नारेबाजी करते हुए न्यूनतम वेतन बढ़ाने की मांग उठाई। प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का कहना है कि राज्य सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम वेतन 12,425 से 16,769 रुपए प्रतिमाह उनके लिए पर्याप्त नहीं है। उनका दावा है कि महंगाई के इस दौर में कम से कम 26 हजार रुपए प्रतिमाह न्यूनतम वेतन मिलना चाहिए। साथ ही कई विभागों में अत्यंत कम भुगतान किए जाने को लेकर भी नाराजगी जताई गई।
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कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि अलग-अलग विभागों में उन्हें बेहद कम मानदेय दिया जा रहा है। राजस्व, स्वास्थ्य, पंचायत, स्कूल शिक्षा और अन्य विभागों में कार्यरत कई श्रमिकों को हजारों रुपए से भी कम भुगतान मिलने की बात कही गई। वहीं कई जगहों पर नियमित कर्मचारियों की तरह काम करवाने के बावजूद स्थायी दर्जा और उचित वेतन नहीं मिलने का मुद्दा भी उठाया गया। अस्थायी और आउटसोर्स कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से सरकार की विभिन्न योजनाओं और प्रशासनिक कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें न्यूनतम वेतन और स्थायी रोजगार का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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कर्मचारियों ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द विचार नहीं किया गया, तो 6 जुलाई को जबलपुर हाईकोर्ट के सामने बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वे न्यूनतम वेतन कानून को सभी विभागों के आउटसोर्स कर्मचारियों पर लागू करने की मांग करेंगे। आंदोलनकारी कर्मचारियों ने सरकार से न्यूनतम वेतन में वृद्धि, नियमितीकरण और आउटसोर्स व्यवस्था की समीक्षा की मांग दोहराई है। उनका कहना है कि यदि समय रहते समाधान नहीं निकला, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
