मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के काजीकैंप से पकड़ाए कट्टरपंथी मोहम्मद फराज उर्फ खालिद से हुई पूछताछ और डिजिटल साक्ष्यों की जांच के बाद अब बिहार के मधुबनी जिले के पंडौल थाना क्षेत्र निवासी इजहार-उल-हक (50) को गिरफ्तार किया। वह मदरसा में बच्चों को तालीम देने का कार्य करता था और पास में ही किराये के मकान में रहता था। उसकी पत्नी व बच्चे भी उसके साथ नहीं रहते हैं।
इजहार की गिरफ्तार भोपाल के मो. फराज और सहारनपुर के नईम अब्दुल्ला से मिले इनपुट के बाद गिरफ्तार किया गया है। इजहार भी पाकिस्तानी हैंडलर के इशारे पर काम करता था। एमपी एटीएस ने उसे स्थानीय कोर्ट में पेश कर ट्रांजिट रिमांड पर लिया है। बुधवार सुबह तक उसे लेकर एटीएस भोपाल आने वाली है।
मदरसा शिक्षक करता था पैसे की व्यवस्था, हिंसक वीडियो भी मिले
मधुबनी जिले से पकड़ाए मदरसा शिक्षक इजहार के मोबाइल में कई हिंदस वीडियो और भारत में शरीयत कानून लागू करने वाली तकरीरों वाली वीडियो और रील्स मिली हैं। इजहार पैसे की फंडिंग का काम देखता था। पूर्व में गिरफ्तार फराज और नईम अब्दुल्ला की सोच बेहद भी खतरनाक थी। इसके प्रमाण उनके मोबाइल में मिले वीडियो से मिल रहे हैं जो काफी हिंसक हैं। माना जा रहा है कि वे ऐसे वीडियो नए जुडऩे वाले युवाओं को दिखाते थे। इजहार-उल-हक आतंकी गतिविधियों के लिए राशि जुटाने का काम करता था। वह बिहार में स्लीपर सेल तैयार करने में लगा था। उसे भौआड़ा गांव की मस्जिद से गिरफ्तार किया गया है। वह मधुबनी में ही किराये के मकान में रहता था।
हरियाणा के नूंह से शाकिर को एटीएस ने गिरफ्तार किया
बिहार से हुई गिरफ्तारी इस नेटवर्क की छठवीं गिरफ्तारी है। सबसे पहले भोपाल के मोहम्मद फराज उर्फ खालिद को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उत्तर प्रदेश के सहारनपुर निवासी नईम अब्दुल्ला को दबोचा गया। इन दोनों से हुई पूछताछ के बाद राजस्थान के अलवर से शाकिर मेव और धार जिले से हाजी अजहर को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद हरियाणा के नूंह से शाकिर को एटीएस ने गिरफ्तार किया है।
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फराज और नईम की आज समाप्त होगी रिमांड
बिहार से पकड़ा गया इस नेटवर्क का छठवां सदस्य है, जो गिरफ्तार हुआ है। मोहम्मद फराज और नईम की रिमांड अवधि आज मंगलवार 16 जून को समाप्त हो रही है। शाकिर मेव और शाकिर 20 जून तक की रिमांड पर हैं। इस पूरे गिरोह की जो सबसे चैकाने वाली बात सामने आई है वह यह है कि यह स्लीपर सेल सिर्फ पाकिस्तानी हैंडलर के संपर्क में नहीं थे। खादी देशों में बैठे हैंडलर भी इन्हें डायरेक्शन देते थे। इन्हें कई देशों से फंडिंग की भी जानकारी मिली है।
