राजधानी भोपाल में लगातार बढ़ती भीषण गर्मी अब लोगों की सेहत पर भारी पड़ने लगी है। तापमान में तेजी के साथ ही उल्टी-दस्त, वायरल बुखार और कमजोरी जैसे मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है। ऐसे समय में शहर के प्रमुख सरकारी स्वास्थ्य केंद्र जयप्रकाश नारायण अस्पताल में दवाओं की कमी ने हालात और गंभीर बना दिए हैं। अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को जरूरी दवाएं नहीं मिल पा रही हैं, जिससे उन्हें मजबूरी में निजी मेडिकल स्टोर्स का रुख करना पड़ रहा है।
बुनियादी दवाओं का टोटा, इलाज पर असर
अस्पताल में इस समय कई आवश्यक दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। इनमें कैल्शियम, आयरन, खून पतला करने वाली दवाएं और मल्टीविटामिन जैसी सामान्य लेकिन जरूरी दवाएं शामिल हैं। ये दवाएं विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, हड्डियों की समस्या से जूझ रहे मरीजों और सामान्य कमजोरी वाले लोगों के लिए बेहद अहम होती हैं। ऐसे में इनका अभाव सीधे तौर पर मरीजों के इलाज को प्रभावित कर रहा है।
बढ़ती गर्मी के साथ मरीजों की संख्या में उछाल
डॉक्टरों के अनुसार, तापमान बढ़ने के साथ ही मौसमी बीमारियों के मरीजों की संख्या में तेजी आई है। रोजाना बड़ी संख्या में लोग उल्टी-दस्त, डिहाइड्रेशन, वायरल बुखार और कमजोरी की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। लेकिन दवाओं की कमी के कारण कई मरीजों को पूरी तरह से उपचार नहीं मिल पा रहा।
मरीजों की परेशानी, बार-बार लगाना पड़ रहा चक्कर
अस्पताल पहुंचे मरीजों ने बताया कि उन्हें कई दिनों से दवाएं नहीं मिल रही हैं। कुछ लोग पिछले 10-15 दिनों से लगातार अस्पताल के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन हर बार उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। खासतौर पर कैल्शियम और आयरन जैसी दवाओं के लिए मरीजों को निजी दुकानों से महंगे दाम पर खरीदारी करनी पड़ रही है।
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आधे से ज्यादा स्टॉक खत्म, व्यवस्था पर सवाल
अस्पताल से जुड़े सूत्रों के मुताबिक इस समय करीब 50 प्रतिशत दवाएं ही उपलब्ध हैं, जबकि बाकी का स्टॉक पूरी तरह खत्म हो चुका है। यह स्थिति ऐसे समय में बनी है, जब मरीजों की संख्या अपने चरम पर है। इससे अस्पताल प्रबंधन और दवा आपूर्ति व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्रबंधन का दावा,जल्द मिलेगी राहत
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि दवाओं की कमी को लेकर सप्लाई का ऑर्डर पहले ही दे दिया गया है और जल्द ही सभी जरूरी दवाएं उपलब्ध करा दी जाएंगी। हालांकि, मरीजों को तत्काल राहत मिलती नजर नहीं आ रही है और उन्हें फिलहाल आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है।
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स्वास्थ्य व्यवस्था पर बढ़ता दबाव
गर्मी के इस दौर में जहां एक ओर मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर दवाओं की कमी ने स्वास्थ्य सेवाओं की चुनौती को और बढ़ा दिया है। यदि जल्द आपूर्ति बहाल नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में स्थिति और बिगड़ सकती है।
