हाई कोर्ट में पत्नी ने पति संग रहने से इनकार किया, प्रेमी संग रहने की इच्छा जताई, अदालत ने काउंसिलिंग के निर्देश दिए। …और पढ़ें

HighLights
- हाई कोर्ट में हैबियस कार्पस याचिका पर हुई सुनवाई।
- पत्नी ने पति के साथ रहने से किया साफ इनकार।
- महिला ने प्रेमी के साथ रहने की इच्छा जताई।
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में एक हैबियस कार्पस याचिका की सुनवाई के दौरान पारिवारिक विवाद का संवेदनशील मामला सामने आया। पत्नी ने खुलेआम पति के साथ रहने से इन्कार करते हुए प्रेमी के साथ रहने की इच्छा जताई। इस मामले में याचिकाकर्ता रामकेश ने आरोप लगाया था कि उसकी पत्नी को अवैध रूप से बंधक बनाकर रखा गया है। सुनवाई के दौरान पुलिस थाना सिरोल के प्रभारी गोविंद वल्लभ बगोली ने महिला को अदालत में पेश किया।
अदालत में महिला ने बताया कि उसकी शादी रामकेश से करीब आठ साल पहले हुई थी। उनके तीन बच्चे हैं। महिला ने आरोप लगाया कि पति लगातार दुर्व्यवहार कर रहा था, जिससे परेशान होकर उसने ससुराल छोड़ दिया। अब वह कालू के साथ रह रही है। उसने साफ कहा कि वह कालू के साथ ही रहना चाहती है।
महिला ने की थी आत्महत्या करने की कोशिश
महिला ने यह भी बताया कि पति के व्यवहार से तंग आकर उसने आत्महत्या करने की कोशिश की थी, लेकिन कालू ने उसे बचाया। रामकेश ने इन आरोपों को नकारते हुए कहा कि वह मजदूरी कर क्षमता के अनुसार पत्नी और परिवार का ध्यान रखता है। पत्नी किसी अन्य के संपर्क में होने के कारण घर छोड़कर गई है।
पति ने कहा- वह पत्नी को अपनाने के लिए तैयार
रामकेश ने अदालत में कहा कि पत्नी वापस आना चाहे तो वह उसे अपनाने को तैयार है। कालू ने भी अदालत में महिला की देखभाल करने का आश्वासन दिया। बताया कि उसने ही महिला को आत्महत्या से बचाया था।
छह महीने तक होगी काउंसिलिंग
मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायमूर्ति आनंद पाठक और न्यायमूर्ति पुष्पेंद्र यादव की खंडपीठ ने कहा कि यह मामला गलतफहमी और परिस्थितियों की कमी से उत्पन्न हुआ है, जिसमें तीन छोटे बच्चों का भविष्य भी जुड़ा है। अदालत ने सरकारी अधिवक्ता डा. अंजलि ज्ञानानी को शौर्या दीदी के रूप में छह महीने तक काउंसलिंग करने का निर्देश दिया है। साथ ही महिला को अगली सुनवाई तक ग्वालियर के कंपू स्थित वन स्टाप सेंटर में रखने के आदेश दिए गए हैं।
