इंदौर नगर निगम ने रीजनल पार्क के कायाकल्प की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। कुछ समय पहले इस पार्क को ठेके पर देने की प्रक्रिया को लेकर काफी विवाद हुआ था जिसके बाद अब निगम प्रशासन ने स्वयं के स्तर पर यहां सुधार कार्य प्रारंभ किए हैं। इस परियोजना के पहले चरण में पार्क परिसर के टूटे हुए इंटरलॉकिंग ब्लॉक्स को बदलने, क्षतिग्रस्त जालियों को सुधारने और अन्य जरूरी मरम्मत के कार्य किए जा रहे हैं।

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पार्क के बदहाल स्वरूप को सुधारने की योजना

इंदौर विकास प्राधिकरण द्वारा करोड़ों की लागत से तैयार किया गया यह क्षेत्रीय पार्क लंबे समय से उचित रखरखाव के अभाव में अपनी चमक खो रहा था। हालांकि यहां पर्यटकों से प्रवेश शुल्क लिया जाता है लेकिन सुविधाओं की कमी और अव्यवस्थाओं के कारण आगंतुकों को परेशानी हो रही थी। हाल ही में निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने क्षेत्र का दौरा कर अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए थे कि पार्क की स्थिति को और बिगड़ने से रोकने के लिए तत्काल कार्य शुरू किए जाएं।

सुधार कार्य और सौंदर्यीकरण का खाका बनाया

जनकार्य समिति प्रभारी राजेंद्र राठौर ने बताया कि अधिकारियों के साथ निरीक्षण के बाद पार्क में सफाई अभियान और बुनियादी मरम्मत का काम तेज कर दिया गया है। पहले चरण में इंटरलॉकिंग टाइल्स और जालियों के काम के साथ बंद पड़े फव्वारों को पुनर्जीवित किया जा रहा है। इसके बाद दूसरे चरण में पूरे परिसर का रंग-रोगन और सौंदर्यीकरण किया जाएगा। पूरे उद्यान में आकर्षक पौधे लगाए जाएंगे ताकि यह फिर से अपने पुराने स्वरूप में लौट सके।

भविष्य में निजी हाथों में सौंपने की तैयारी

निगम की योजना है कि एक बार पार्क पूरी तरह सज-धज कर तैयार हो जाए तो इसके रखरखाव की जिम्मेदारी निजी ठेकेदार को सौंपी जाए। इसके लिए निगम द्वारा कड़ी शर्तें और नियम तैयार किए जा रहे हैं ताकि भविष्य में रखरखाव को लेकर कोई लापरवाही न हो और विवादों से बचा जा सके।

मेघदूत उपवन में भी सुधार की पहल

रीजनल पार्क के साथ-साथ मेघदूत उपवन में भी व्यवस्थाएं सुधारी जा रही हैं। स्थानीय नागरिकों की शिकायतों के बाद यहां बंद पड़े फव्वारों को फिर से चालू कर दिया गया है। यहां एसटीपी से ट्रीटेड पानी की लाइन बिछाई गई है लेकिन पानी की प्रकृति के कारण फव्वारे अक्सर खराब हो जाते थे। अब निगम ऐसी तकनीकी व्यवस्था कर रहा है जिससे फव्वारे निरंतर चलते रहें और नागरिकों को असुविधा न हो।



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