मूक-बधिर विधवा दुष्कर्म पीड़िता को गर्भपात की अनुमति मिल गई है। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि किसी भी महिला को उसकी इच्छा के विरुद्ध गर्भ जारी रखन …और पढ़ें

HighLights
- यौन शोषण की शिकार दिव्यांग महिला को न्याय
- 20 सप्ताह के गर्भ को समाप्त करने की मंजूरी
- मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के बाद कोर्ट का आदेश
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने 30 वर्षीय मूक-बधिर विधवा दुष्कर्म पीड़िता को गर्भपात की अनुमति दे दी है। जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के ने कहा कि पीड़िता की गरिमा, मानसिक स्थिति और भविष्य को देखते हुए यह जरूरी है। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि किसी भी महिला को उसकी इच्छा के विरुद्ध गर्भ जारी रखने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने पीड़िता की शारीरिक और मानसिक स्थिति को सर्वोपरि मानते हुए यह अनुमति दी। पीड़िता दिव्यांग है और सुनने-बोलने में असमर्थ है, जिससे मामला और संवेदनशील हो गया।
परिजनों द्वारा प्रताड़ना और घटना का खुलासा
पीड़िता की ओर से याचिका उसके भाई ने दायर की थी। उसमें बताया गया कि पीड़िता भिंड जिले के गांव खानेटा में ससुराल में रह रही थी। उसके पति की चार साल पहले मौत हो चुकी है। उसका भाई (पीड़िता का देवर) उसकी देखभाल करता है। 11 मार्च को भाई जब मिलने पहुंचा तो सास मिथलेश, ससुर अजब सिंह और देवर गोदान व करू उसे पीटते मिले। बाद में गोहद अस्पताल में जांच में पता चला कि वह करीब 19 सप्ताह पांच दिन की गर्भवती है। आरोप है कि यह गर्भ यौन शोषण का नतीजा है।
यह भी पढ़ें- बीच सड़क बर्थ-डे केक काटने से टोका, तो गुना में भाजपा नेता के परिवार पर चढ़ा दी जीप, 4 घायल
मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट और न्यायालय के निर्देश
कोर्ट के आदेश पर कमलाराजा अस्पताल और जीआर मेडिकल कॉलेज, ग्वालियर के मेडिकल बोर्ड ने जांच की। रिपोर्ट में गर्भपात को सुरक्षित बताया गया। इसके बाद हाई कोर्ट ने गर्भपात कराने के आदेश दिए। साथ ही भ्रूण का डीएनए सैंपल सुरक्षित रखने, पीड़िता की पहचान गोपनीय रखने और पूरी प्रक्रिया मुफ्त कराने के निर्देश भी दिए गए।
