भोपाल में एक होटल में खाने को लेकर शुरू हुआ विवाद अब बड़ा मुद्दा बन गया है। एडवोकेट पर दर्ज एफआईआर के विरोध में शुक्रवार शाम हबीबगंज थाने का वकीलों ने घेराव कर दिया। मामला सिर्फ मारपीट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पुलिस की कार्रवाई पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। घटना गुरुवार रात की है, जब एडवोकेट सिकंदर सिंह राजपूत 11 नंबर स्थित घर की रसोई होटल में खाना खाने पहुंचे थे। आरोप है कि उन्हें जो सब्जी परोसी गई, वह खराब और बदबूदार थी। इस पर जब उन्होंने होटल मैनेजमेंट से शिकायत की, तो विवाद बढ़ गया। एडवोकेट का आरोप है कि होटल स्टाफ ने गलती मानने के बजाय उनके साथ अभद्रता की और बाद में अन्य कर्मचारियों को बुलाकर मारपीट की गई। इतना ही नहीं, झगड़े के दौरान उनकी सोने की चेन छीने जाने का भी आरोप लगाया गया है।


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शिकायत करने गए, खुद पर ही केस दर्ज

घटना के बाद एडवोकेट जब थाने पहुंचे तो पुलिस ने उनकी शिकायत पर तत्काल कार्रवाई नहीं की और सिर्फ आवेदन लेकर भेज दिया। लेकिन अगले ही दिन उन्हें पता चला कि पुलिस ने उल्टा उन्हीं के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी है। एडवोकेट का कहना है कि थाने में भी उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया और विरोध करने पर एकतरफा कार्रवाई की गई।

 कार्रवाई पर सवाल

होटल में हुए पूरे विवाद का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें कथित तौर पर होटल स्टाफ की अभद्रता नजर आ रही है। इसके बावजूद पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर शिकायतकर्ता पर ही केस क्यों दर्ज किया गया।

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वकीलों का आक्रोश, थाने का घेराव

इसी के विरोध में वकीलों ने हबीबगंज थाने का घेराव किया और एफआईआर निरस्त करने की मांग उठाई। एडवोकेट सौरभ स्थापक का कहना है कि यह कोई पहला मामला नहीं है, जब वकीलों के खिलाफ एकतरफा कार्रवाई हुई हो। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा और इसे प्रदेश स्तर तक ले जाया जाएगा।

 



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