बारह साल पहले तीन सौ करोड़ की लागत से बना इंदौर का बीआरटीएस अब तेजी से हटने लगा है। इसके बस स्टेशनों को तोड़ने का काम भी तेज हो गया है। इसे लेकर कोर्ट में लगी याचिका के दौरान जज तोड़ने में हो रही देरी को लेकर कई बार अफसरों पर नाराजगी दर्ज करा चुके हैं। उधर एलआईजी वाले हिस्से में एलिवेटेड रोड बनाने का काम भी शुरू हो चुका है।
इंदौर में निरंजनपुर चौराहा से राजीव गांधी प्रतिमा चौराहा तक बने बीआरटीएस में आई बसों का संचालन एआईसीटीएसएल करता है। प्रतिदिन एक लाख से सत्तर हजार तक यात्री आई बस में सफर करते थे, लेकिन बीआरटीएस की रेलिंग हटने के कारण यात्रियों की संख्या में तीस प्रतिशत तक कमी आई है।
अब यह बसें मिक्स ट्रैफिक में चल रही हैं। ज्यादा छात्र और नौकरीपेशा इन बसों का उपयोग करते थे। पूरे ग्यारह किलोमीटर हिस्से में एक तरफ की रेलिंग हटा दी गई है, वहीं बस स्टेशनों को तोड़ने का काम भी अब तेज हो गया है। कोर्ट के समक्ष अफसरों ने कहा है कि मार्च माह तक सारी बाधाएं दूर हो जाएंगी।
ग्यारह किलोमीटर लंबे बीआरटीएस पर पीडब्ल्यूडी एलिवेटेड कॉरिडोर बना रहा है। इस पर चार सौ करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि खर्च होगी। इसके लिए बीआरटीएस हटाने का फैसला लिया गया।
सालभर पहले कोर्ट ने दी थी अनुमति
हाईकोर्ट में बीआरटीएस हटाने के लिए याचिका लगी थी, लेकिन बीते कई वर्षों से नगर निगम बीआरटीएस की उपयोगिता बताते हुए अपना पक्ष रखता आ रहा था, लेकिन मुख्यमंत्री मोहन यादव की घोषणा के बाद नगर निगम ने खुद हाईकोर्ट के समक्ष कहा था कि सरकार बीआरटीएस हटाना चाहती है।
इसके बाद कोर्ट ने भी इसकी मंजूरी दी। जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीनीकरण मिशन के तहत इंदौर बीआरटीएस देश का पहला स्वीकृत प्रोजेक्ट था। इंदौर के बाद पुणे, दिल्ली, भोपाल, अहमदाबाद में भी बीआरटीएस प्रोजेक्ट मंजूर हुए थे, हालांकि इंदौर से पहले अहमदाबाद का बीआरटीएस बनकर तैयार हो गया था।
