मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान घटी एक अप्रत्याशित घटना ने सियासी हलकों में हलचल पैदा कर दी। कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे ने उप नेता प्रतिपक्ष के पद से इस्तीफा दे दिया। अब उनके इस फैसले के पीछे की वजह सामने आई है, जिसमें पार्टी के भीतर तालमेल की कमी को अहम कारण माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, सदन की कार्यवाही के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और सचेतक सोहन वाल्मीक लंच के लिए बाहर चले गए थे।
इसी बीच कटारे को एक पारिवारिक समारोह में शामिल होने के लिए शताब्दी एक्सप्रेस से रवाना होना था। चूंकि सदन में नेता प्रतिपक्ष और सचेतक मौजूद नहीं थे, ऐसे में कटारे सदन की कार्यवाही छोड़कर नहीं जा सके। समन्वय की कमी के कारण वे समय पर स्टेशन नहीं पहुंच पाए और उनकी ट्रेन छूट गई।
बताया जा रहा है कि कटारे अपने मामा के पुत्र के विवाह में शामिल होने जा रहे थे। यह भी चर्चा में है कि उन्होंने अपने यात्रा कार्यक्रम की पूर्व जानकारी नेता प्रतिपक्ष को नहीं दी थी। बाद में इस मुद्दे पर दोनों के बीच बातचीत हुई, जिसमें सूचना न देने को लेकर नाराजगी जताई गई।
कांग्रेस मेरे स्वर्गीय पिताजी की विरासत है !
और हाँ… मेरे फोन न उठाने पर कृपया भारी-भरकम क़यास ना लगायें। 😃🙏
शादी की सालगिरह पर परिवार के साथ समय बिताना कोई राजनीतिक साज़िश नहीं बल्कि मेरा मूलभूत और संवैधानिक अधिकार भी है।
कभी कभी नेता भी इंसान होता है.🙏
अब ज़रा ध्यान से…
— Hemant Satyadev Katare (@HemantKatareMP) February 21, 2026
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सोशल मीडिया पर दी सफाई
इस्तीफे के बाद सबसे पहले प्रतिक्रिया खुद हेमंत कटारे की ओर से सामने आई। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए साफ किया कि उनका फैसला पूरी तरह निजी और पारिवारिक कारणों से जुड़ा है। उन्होंने लिखा कि कांग्रेस उनके स्वर्गीय पिता की विरासत है और फोन न उठाने को लेकर किसी तरह के राजनीतिक कयास न लगाए जाएं। शादी की सालगिरह पर परिवार के साथ समय बिताना उनका अधिकार है, इसे किसी साजिश से न जोड़ा जाए।
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कटारे ने भाजपा पर साधा निशाना
कटारे ने विपक्षी दल भाजपा पर भी निशाना साधते हुए कहा कि अनावश्यक खुशफहमी पालने की जरूरत नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे सोमवार से सदन में पूरी तैयारी और दस्तावेजों के साथ उपस्थित रहेंगे। अपने संदेश में उन्होंने भरोसा जताया कि वे विभिन्न मुद्दों चाहे वह गोमांस का मामला हो, इंदौर के भागीरथपुरा का विषय, शंकराचार्य के अपमान का प्रश्न, या प्रदूषण और कथित भ्रष्टाचार से जुड़े मुद्दे हर विषय पर तथ्य और तर्क के साथ सरकार को घेरेंगे।
