नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इंदौर के भगीरथपुरा में हुई सत्रह मौतों को लेकर कहा कि नर्मदा लाइन में दूषित पानी मिलने के कारण लोग बीमार हुए। यह लापरवाही भाजपा सरकार को कठघरे में खड़ा करने के लिए काफी है। इतनी मौतें महामारी या प्रकोप नहीं बल्कि लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक लापरवाही है।

 

सिंगार ने कहा कि भागीरथपुरा में ढाई हजार से ज्यादा लोग बीमार हुए है। लापरवाही की सजा लोगों को भुगतना पड़ी। इंदौरवासियों ने भाजपा को हर स्तर पर समर्थन दिया। लोकसभा चुनाव से लेकर नगर निगम चुनाव तक जनता से भाजपा को सत्ता का पूरा भरोसा मिला लेकिन बदले में भाजपा ने इंदौर को सिर्फ उपेक्षा, अव्यवस्था, धोखा और संवेदनहीन शासन दिया।

 

ट्रिपल इंजन सरकार पूर्ण जनादेश के बावजूद इंदौर के नागरिकों को सुरक्षित पेयजल तक उपलब्ध नहीं करा पाई। यह शर्म की बात है। जनता से जुड़े सवाल पर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग करते है। उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई लेकिन देवास एसडीएम ने मंत्री की बात दोहराई तो उन्हें निलंबित कर दिया।

 

उन्होंने कहा कि इंदौर स्वच्छता में सरताज रहा है, लेकिन बस्ती में फैली बीमारी ने जमीनी हकीकत बता दी है। कई बस्तियों में गंदे पानी की समस्या है। हर स्तर पर शिकायतें होती है,लेकिन भाजपा के जनप्रतिनिधि, अफसर उन शिकायतों को हलके में लेते है। यदि समय रहते ध्यान दिया होता तो इस तरह का हादसा नहीं होता। इंदौर की प्रतिष्ठा भी इस घटना के कारण धूमिल हुई है। इसके जिम्मेदार शहर के जनप्रतिनिधि है। ढाई साल तक पाइप लाइन का टेंडर दबाए रखा गया। इसमें देरी करने वाले सजा के हकदार है।



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