मध्यप्रदेश इस समय कड़ाके की ठंड की गिरफ्त में है। उत्तर से आ रही सर्द हवाओं के कारण पूरे प्रदेश में तापमान तेजी से गिरा है। राजधानी भोपाल, इंदौर, ग्वालियर सहित 26 शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज किया गया। करीब दो हफ्ते बाद प्रदेश में दोबारा शीतलहर और कोल्ड डे की स्थिति बन गई है। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटे प्रदेश के कई जिलों में शीतलहर चलने का अलर्ट जारी किया है।

अगले दो दिन अलर्ट मोड पर मौसम विभाग

मौसम विभाग के अनुसार रविवार को भोपाल, सीहोर, राजगढ़ और शाजापुर में तेज सर्द हवाओं के साथ शीतलहर का असर रहेगा। वहीं सोमवार को भोपाल, राजगढ़, शाजापुर, सीहोर, सिवनी और शहडोल में कोल्ड वेव की स्थिति बन सकती है। ठंडी हवाओं की रफ्तार बढ़ने से ठिठुरन और बढ़ने की संभावना जताई गई है।

पहाड़ों की बर्फबारी से बढ़ी ठंड

वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में बर्फबारी और बारिश हुई है। इसके बाद पहाड़ों से निकलकर आने वाली बर्फीली हवाएं सीधे मध्यप्रदेश पहुंच रही हैं। पिछले दो दिनों से यही हवाएं प्रदेश में ठंड का असर बढ़ा रही हैं।

इन संभागों में ठंड का सबसे ज्यादा प्रभाव

ग्वालियर, चंबल, उज्जैन और सागर संभाग बीते दो दिनों से सबसे ज्यादा ठंड की चपेट में हैं। उत्तर भारत से सीधे सर्द हवाएं आने के कारण इन इलाकों में दिन और रात दोनों समय तापमान औसत से नीचे बना हुआ है।

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सीजन की सबसे सर्द रातें, 5 डिग्री से नीचे पारा

शुक्रवार और शनिवार की रात प्रदेश में इस सीजन में पहली बार तापमान 5 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला गया। शहडोल जिले का कल्याणपुर सबसे ठंडा रहा, जहां न्यूनतम तापमान 4 डिग्री दर्ज हुआ। उमरिया में 4.8 डिग्री और राजगढ़ में 5 डिग्री तापमान रहा। बड़े शहरों में इंदौर 6.2 डिग्री, ग्वालियर 7.6 डिग्री और भोपाल 8.2 डिग्री के साथ सर्दी से कांपता नजर आया।

दिन में भी राहत नहीं, पारा 25 डिग्री से नीचे

रात की तरह दिन भी ठंडे रहे। अधिकांश शहरों में अधिकतम तापमान 25 डिग्री से कम रिकॉर्ड किया गया। बालाघाट का मलाजखंड सबसे ठंडा रहा, जहां दिन का तापमान 21.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। कई शहरों में दिनभर धूप के बावजूद ठंड का अहसास बना रहा।

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दिसंबर-जनवरी में और बढ़ेगी ठंड

मौसम विभाग का कहना है कि इस साल ठंड का असर सामान्य से ज्यादा रहेगा। भोपाल में नवंबर में ही 84 साल पुराना रिकॉर्ड टूट चुका है, जबकि इंदौर में 25 साल में इतनी ठंड पहली बार दर्ज की गई। विशेषज्ञों के मुताबिक दिसंबर और जनवरी ठंड के लिहाज से सबसे अहम महीने होते हैं और इस दौरान शीतलहर और मावठा दोनों का असर देखने को मिल सकता है।



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