प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मंच पर और उसके नीचे दोनों जगह धक्का-मुक्की और हाथापाई की नौबत आ गई। स्थिति बिगड़ती देख विश्वविद्यालय प्रशासन ने पुलिस को स…और पढ़ें

HighLights
- एमबीए और बीबीए सीटों को लेकर हुआ विवाद
- पुलिस के दखल के बाद रोकी गई काउंसलिंग
- पानी को तरसे, दिनभर भूखे-प्यासे रहे छात्र
नईदुनिया प्रतिनिधि,ग्वालियर। जीवाजी विश्वविद्यालय की अध्ययनशालाओं (एसओएस) में लंबे समय के बाद प्रवेश परीक्षा के आधार पर शुरू हुई प्रवेश प्रक्रिया का पहला दिन ही अव्यवस्थाओं और विवादों की भेंट चढ़ गया। बुधवार को अटल सभागार में आयोजित काउंसलिंग के दौरान छात्र संगठनों के बीच तीखी बहस और हाथापाई की स्थिति बन गई, जिसके चलते विश्वविद्यालय प्रशासन को बीच में ही पूरी प्रक्रिया रोकनी पड़ी। अब खाली सीटों पर प्रवेश और आगे की काउंसलिंग संबंधित विभागों में कराई जाएगी।
सुबह 10 बजे शुरू हुई काउंसलिंग में यूजी की 913 और पीजी की 587 सीटों के लिए बड़ी संख्या में विद्यार्थी और उनके अभिभावक पहुंचे थे। छात्र पूरे दिन अपनी बारी का इंतजार करते रहे, लेकिन शाम होते-होते माहौल तनावपूर्ण हो गया। करीब साढ़े सात बजे एमबीए (एचआर) में प्रवेश को लेकर जेयू एनएसयूआई के छात्रनेता प्रवेश समिति अध्यक्ष प्रो. डीएन गोस्वामी से चर्चा कर रहे थे। इसी दौरान एबीवीपी के पदाधिकारी भी वहां पहुंचे और आपत्ति जताई। देखते ही देखते दोनों पक्षों के बीच बहस तेज हो गई और माहौल गर्मा गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मंच पर और उसके नीचे दोनों जगह धक्का-मुक्की और हाथापाई की नौबत आ गई। स्थिति बिगड़ती देख विश्वविद्यालय प्रशासन ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस और सुरक्षा कर्मियों के हस्तक्षेप के बाद दोनों गुटों को अलग किया गया, लेकिन तब तक काउंसलिंग का माहौल पूरी तरह प्रभावित हो चुका था। इसके बाद प्रवेश समिति अध्यक्ष प्रो. डीएन गोस्वामी ने काउंसलिंग प्रक्रिया समाप्त करने की घोषणा कर दी।
दिन में भी हुआ विवाद
इससे पहले दोपहर में बीबीए में प्रवेश को लेकर प्रवेश समिति सदस्य डा. सपन पटेल के साथ कुछ छात्र नेताओं की तीखी बहस और अभद्र व्यवहार की शिकायत भी सामने आई थी। आरोप है कि प्रवेश प्रक्रिया में श्रेणी के विवाद को लेकर छात्र नेताओं ने समिति सदस्य के साथ अभद्र व्यवहार किया था। बता दें कि लगातार बढ़ते विवादों के कारण पूरा दिन तनावपूर्ण माहौल में बीता।
एक दूसरे पर लगाए आरोप
घटना के बाद दोनों छात्र संगठनों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए हैं। एबीवीपी ने प्रवेश प्रक्रिया में अनियमितता और दबाव बनाकर प्रवेश कराने का आरोप लगाया है, जबकि एनएसयूआई ने शिक्षकों के साथ अभद्रता और अनावश्यक विवाद खड़ा करने के लिए एबीवीपी कार्यकर्ताओं को जिम्मेदार ठहराया है। वर्षों के बाद शुरू हुई प्रवेश परीक्षा आधारित प्रक्रिया से छात्रों को बेहतर और व्यवस्थित प्रवेश व्यवस्था की उम्मीद थी, लेकिन पहले ही दिन हुए हंगामे और अव्यवस्थाओं ने उन उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
निराश हो कर गए विद्यार्थी
इन घटनाओं का सबसे अधिक असर प्रवेश के लिए पहुंचे विद्यार्थियों पर पड़ा। सुबह से शाम तक अपनी बारी का इंतजार कर रहे छात्रों को न केवल अव्यवस्थाओं का सामना करना पड़ा, बल्कि मूलभूत सुविधाओं के अभाव से भी जूझना पड़ा। कई विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कि सभागार में पीने के पानी तक की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। घंटों इंतजार के बावजूद प्रक्रिया प्रभावित होने से छात्रों और अभिभावकों में नाराजगी देखी गई। आखिर में कई विद्यार्थियों को निराश होकर घर लौटना पड़ा।
