ग्वालियर की पांच वर्षीय बेसहारा बालिका को फास्टर केयर योजना के तहत नया परिवार मिला। तीन साल बालिका गृह में रहने के बाद कारोबारी दंपती ने उसे बेटी बनाय…और पढ़ें

HighLights
- सिग्नल पर भीख मांगने वाली बच्ची को मिला परिवार।
- पुलिस रेस्क्यू के बाद बालिका गृह में रखा गया।
- तीन साल तक माता-पिता का इंतजार करती रही बच्ची।
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। पांच साल की मासूम सिग्नल पर भीख मांगती थी। कुछ मिला तो ठीक, वरना भूखे ही सो जाती थी। एक दिन उसका भाग्य चमक गया, शायद भगवान की नजर उस पर पड़ गई। पुलिस ने भीख मांगने वाले बच्चों को रेस्क्यू किया। तभी आठ साल की पिंकी (परिवर्तित नाम) अधिकारियों को मिल गई।
माता पिता की खोज चालू हुई, लेकिन कोई सामने नहीं आया। पुलिस भी खोज नहीं पाई। पिंका को बालिका गृह में रखा गया, जहां उसने तीन साल बिताए। जैसे ऊपर लिखा था कि भगवान की नजर उस पर पड़ गई थी। उन्होंने अपने फरिश्ते भेज दिए। ग्वालियर शहर के मुरार इलाके के कारोबारी दंपती के रूप में। उन्होंने उसे बेटी के रूप में अपना लिया। पिंकी को माता पिता मिल गए।
पिंकी को देख तय किया.. यही बनेगी उनकी बेटी
- कारोबारी दंपती ने पिंकी को महिला एवं बाल विकास विभाग की फास्टर केयर योजना के तहत अपनाया है। दंपती ने बालिका गृह में विजिट किया। पिंकी को एक नजर में देखकर तय कर लिया कि उनके घर की बेटी अब यही बनेगी। अब पिंकी बहुत खुश है। उसे अपना परिवार मिल गया है।
- महिला एवं बाल विकास विभाग से मिली जानकारी के अनुसार शासन की फास्टर केयर योजना में एक साल से 18 साल की उम्र के बच्चों को शामिल किया जाता है। ग्वालियर के बालिका गृह में रहने के दौरान पिंकी ने माता पिता का काफी इंतजार किया, लेकिन कोई नहीं आया। 5 साल की उम्र में पिंकी को रेस्क्यू किया था। तीन साल गृह में रहने के बाद फास्टर केयर का लाभ मिला।
फास्टर केयरः ग्वालियर को ऐसे मददगारों की जरूरत
- शासन की फास्टर केयर यानी पालन पोषण योजना में पिछले ढाई साल से किसी ने रुचि नहीं दिखाई है। बालिका गृह में चार बालिकाएं हैं, जो लीगल फ्री हैं और फास्टर केयर में जाने का इंतजार है। फास्टर केयर में छह साल से लेकर 18 की उम्र के अंदर तक के बच्चों से लेकर किशोरों को शामिल किया जाता है।
- शासन इसके लिए चार हजार रूपये प्रति केस भी प्रदान करता है। इसमें गोद भी दिए जाने का प्रविधान है, क्योंकि गोद लिए जाने को लेकर निसंतान दंपत्तियों की कारा पोर्टल पर कतार है, वहां पेंडेंसी ही खत्म नहीं होती है। ऐसे में यह योजना बड़ा विकल्प है। फास्टर केयर के बच्चों को गोद के लिए भी अधिकृत कर दिया जाता है। इस तरह से फास्टर केयर एक महत्वपूर्ण योजना है।

ढाई साल से आवेदकों की संख्या बराबर
फास्टर केयर योजना में अभी लोग कम रुचि दिखा रहे हैं। इसको लेकर हम जागरूक कर रहे हैं। ढाई साल से आवेदकों की संख्या न के बराबर है। इसमें 6 से 18 साल के बच्चों व नाबालिगों को देखरेख के लिए लिया जा सकता है। हर साल रिन्युअल हो जाता है और गोद लिए जाने का विकल्प भी है। उपासना राय, जिला कार्यक्रम अधिकारी, ग्वालियर
