इंदौर में देवास नाका क्षेत्र में आकार ले रहे ब्रिज की सर्विस रोड के लिए सोमवार को इंदौर विकास प्राधिकरण और प्रशासन ने एक साथ 40 से ज्यादा दुकानें तोड़ दीं। इस कार्रवाई को लेकर बेरोजगार हुए दुकानदारों ने विरोध भी किया, लेकिन अधिकारियों का कहना था कि वर्षों से प्राधिकरण की जमीन पर कब्जा कर व्यापार किया जा रहा था और अब वहां से सर्विस रोड निकालना जरूरी है।
देवास नाका में एमपीआरडीसी ब्रिज का निर्माण कर रहा है। ब्रिज का लगभग 70 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। ब्रिज के पास सर्विस रोड के निर्माण में 40 दुकानें बाधक बनी हुई थीं। नगर निगम ने एक माह पहले ही दुकानदारों को नोटिस दे दिया था। इन दुकानों में रेस्टोरेंट, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो पार्ट्स सहित अन्य व्यवसाय संचालित हो रहे थे। दुकानदारों ने करीब 20 वर्षों से इंदौर विकास प्राधिकरण की जमीन पर अतिक्रमण कर दुकानें बना रखी थीं। इसी कारण उनके पास जमीन के वैध दस्तावेज नहीं थे।
कुछ दुकानदारों ने कलेक्टर से मिलकर मदद भी मांगी थी, लेकिन अतिक्रमण होने के कारण उन्हें कोई राहत नहीं मिल सकी।सुबह नगर निगम का अमला चार पोकलेन मशीनों और 50 से अधिक श्रमिकों के साथ मौके पर पहुंचा। अधिकांश दुकानें पहले ही खाली कर दी गई थीं। हालांकि एक दुकानदार ने अपनी मोबाइल की दुकान खाली नहीं की थी। दुकानों को तोड़ते समय अधिकारियों की नजर उस दुकान पर पड़ी और ताला खुलवाकर सामान बाहर निकलवाया गया।
दुकानदारों को भी इस बात का अंदेशा था कि अतिक्रमण के कारण उनकी दुकानें कभी भी हटाई जा सकती हैं, इसलिए उन्होंने दुकानों का पक्का निर्माण नहीं कराया था। इसी वजह से उन्हें तोड़ने में ज्यादा परेशानी नहीं हुई। महज दो घंटे में 40 दुकानें जमींदोज कर दी गईं।
मंगलवार से नगर निगम मलबा हटाने का काम शुरू करेगा। इसके बाद प्राधिकरण अपनी जमीन एमपीआरडीसी को सौंपेगा। लगभग 15 दिन बाद सर्विस रोड का निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।
