मध्य प्रदेश सरकार ने नगरीय निकायों में कार्यरत कर्मचारियों के हित में महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए सेवाकाल के दौरान असमय मृत्यु होने पर उनके आश्रितों को आर्थिक सहायता देने की व्यवस्था लागू की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में लिए गए इस निर्णय के तहत नगर निगम, नगर पालिका परिषद और नगर परिषद के कर्मचारियों के परिवारों को अधिकतम 1.25 लाख रुपये तक का अनुग्रह अनुदान प्रदान किया जाएगा।
ये भी पढ़ें- MP News: विधानसभा के मानसून सत्र में पेश होगा अवैध कॉलोनियों पर सख्त कानून, 10 साल तक की सजा का प्रावधान
नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इस फैसले को कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए बड़ा संबल बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की संवेदनशील और जनकल्याणकारी सोच के कारण नगरीय निकाय कर्मियों को सामाजिक सुरक्षा का मजबूत आधार मिला है। उन्होंने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार कर्मचारियों के हितों और उनके परिवारों की सुरक्षा के लिए लगातार प्रतिबद्ध है।
ये भी पढ़ें- MP: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की समीक्षा में CM बोले-गुजरात की तर्ज पर मध्य प्रदेश में बनाएं ‘गिफ्ट सिटी’
मंत्री श्री विजयवर्गीय ने बताया कि मध्य प्रदेश वेतन पुनरीक्षण नियम, 2017 के अंतर्गत आने वाले नगरीय निकाय कर्मचारियों की सेवा के दौरान मृत्यु होने पर उनके आश्रितों को कर्मचारी के बैंड वेतन और ग्रेड पे के कुल योग के छह गुना के बराबर राशि अनुग्रह अनुदान के रूप में दी जाएगी। हालांकि, इस सहायता की अधिकतम सीमा 1 लाख 25 हजार रुपये निर्धारित की गई है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था 1 अप्रैल 2025 से प्रभावी मानी जाएगी। अर्थात इस तिथि और इसके बाद सेवाकाल में मृत्यु के सभी पात्र मामलों में आश्रितों को इस योजना का लाभ मिलेगा। सरकार के इस निर्णय को नगरीय निकायों के मैदानी कर्मचारियों, सफाई कर्मियों और अन्य सेवकों के हित में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे कठिन परिस्थितियों में कार्य करने वाले कर्मचारियों के परिवारों को आर्थिक सहारा मिलेगा और सामाजिक सुरक्षा की भावना को मजबूती मिलेगी।
