अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव और युद्ध के बीच पिछले कुछ दिनों से यह चर्चा तेज हो गई थी कि कैंसर और कीमोथेरेपी में इस्तेमाल होने वाली महत्वपूर्ण दवाओं की भारी कमी हो सकती है। यह भी कहा जा रहा था कि दवाओं का कच्चा माल प्रभावित होने से उत्पादन लगभग बंद हो गया है और जल्द ही मरीजों को दवाएं नहीं मिलेंगी या उनकी कीमतों में 50 फीसदी तक बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि, इस मामले में जुटाई गई जानकारी के अनुसार फिलहाल ऐसी कोई स्थिति नहीं है। मध्य प्रदेश में कैंसर और कीमोथेरेपी से जुड़ी जरूरी दवाएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं और मरीजों को किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ रहा है।

सिस्प्लैटिन, कार्बोप्लेटिन और ऑक्सालिप्लाटिन को लेकर फैली थी चर्चा

कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली सिस्प्लैटिन, कार्बोप्लेटिन और ऑक्सालिप्लाटिन जैसी महत्वपूर्ण दवाओं का स्टॉक जल्द खत्म होने की खबरें सामने आ रही थीं। इन खबरों से प्रदेश के करीब 1.25 लाख कैंसर मरीजों और उनके परिजनों के बीच चिंता का माहौल बन गया था। लेकिन वर्तमान स्थिति में इन दवाओं की उपलब्धता सामान्य बनी हुई है और बाजार में किसी प्रकार की कमी नहीं देखी जा रही है।

केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन ने क्या कहा?

मध्य प्रदेश केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष गौतमचंद धींग ने बताया कि उन्होंने प्रदेशभर के डिस्ट्रीब्यूटर्स और अपने विभिन्न स्रोतों से जानकारी जुटाई है। उन्होंने कहा कि अभी मध्य प्रदेश में कैंसर की दवाओं की कोई कमी नहीं है और न ही इनके दाम बढ़ाए गए हैं। वर्तमान में ऐसी कोई स्थिति दिखाई नहीं दे रही है जिससे मरीजों को चिंता करने की जरूरत हो। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुए युद्ध का असर कच्चे माल की सप्लाई पर पड़ सकता है। भविष्य में यदि सप्लाई प्रभावित होती है तो स्थिति बदल सकती है, लेकिन फिलहाल दवाओं की उपलब्धता पूरी तरह सामान्य है।

डॉक्टरों ने भी जताई भविष्य को लेकर आशंका

कैंसर सर्जन डॉ. दीपक अग्रवाल का कहना है कि अधिकांश कैंसर मरीजों को कीमोथेरेपी की जरूरत पड़ती है। उन्होंने बताया कि अभी दवाओं की कोई कमी नहीं है, लेकिन यदि युद्ध लंबा चलता है और सप्लाई चेन प्रभावित होती है तो आने वाले समय में दवाओं की कमी और कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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क्यों उठी थी दवाओं की कमी की आशंका?

विशेषज्ञों के मुताबिक दवाओं की संभावित किल्लत को लेकर तीन प्रमुख कारण बताए जा रहे थे-

1. युद्ध का असर

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और संघर्ष के कारण वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित होने की आशंका जताई गई।

2. प्लेटिनम की बढ़ती कीमत

सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) डेटा सेंटर की बढ़ती मांग के कारण प्लेटिनम की कीमतें तेजी से बढ़ने की चर्चा रही। बताया गया कि इसकी कीमत करीब 8 हजार रुपये प्रति ग्राम तक पहुंच गई है।

3. उत्पादन प्रभावित होने की आशंका

कच्चे माल की लागत बढ़ने और सप्लाई बाधित होने की आशंका के चलते कुछ कंपनियों द्वारा उत्पादन घटाने या रोकने की चर्चाएं भी सामने आई थीं।



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