इंदौर के कॉलेजों में बड़े बदलाव हो रहे हैं। शहर के अधिकांश कॉलेज पूरी तरह से ऑनलाइन सिस्टम पर शिफ्ट हो रहे हैं। इस बदलाव के बाद स्टूडेंट्स को फीस भरने के लिए लाइनों में नहीं लगना पड़ेगा और नए कोर्स और कॉलेज से जुड़ी सभी जानकारियां उन्हें ऑनलाइन ही मिल जाएंगी। इस बदलाव में शहर के सरकारी कॉलेज भी शामिल हैं। 

समय और संसाधनों की बचत पर फोकस

प्रतिष्ठित शासकीय होलकर साइंस कॉलेज में भी इस साल नए शैक्षणिक सत्र से यह बदलाव करने जा रहा है। कॉलेज प्रशासन ने आगामी सत्र से संपूर्ण व्यवस्थाओं को पूरी तरह डिजिटल करने का निर्णय लिया है। इसके तहत विद्यार्थियों को फीस जमा करने, परीक्षा शुल्क भरने, पेनल्टी भुगतान करने और विभिन्न प्रशासनिक आवेदनों के लिए अब कॉलेज के चक्कर नहीं काटने होंगे। कॉलेज प्रबंधन का दावा है कि इस नए ऑटोमेशन सिस्टम के लागू होने के बाद छात्रों को केवल अपनी नियमित पढ़ाई और कक्षाओं में शामिल होने के लिए ही परिसर में आने की जरूरत पड़ेगी, बाकी के सभी गैर-शैक्षणिक कार्य ऑनलाइन माध्यम से घर बैठे ही निपटाए जा सकेंगे। डिजिटलाइजेशन की इस पहल से विद्यार्थियों के समय की भारी बचत होगी और उन्हें लंबी कतारों के साथ-साथ जटिल कागजी प्रक्रियाओं से भी पूरी तरह मुक्ति मिल जाएगी। हालांकि वर्तमान समय में भी कॉलेज की कुछ चुनिंदा सेवाएं ऑनलाइन संचालित हो रही हैं, लेकिन कई महत्वपूर्ण कार्यों के लिए छात्रों को व्यक्तिगत रूप से कॉलेज आना पड़ता है। अब संस्थान एक एकीकृत डिजिटल सिस्टम के जरिए अपनी सभी व्यवस्थाओं को एक ही मंच पर लाने की तैयारी कर रहा है। इसके साथ ही कॉलेज की कई आंतरिक प्रशासनिक प्रक्रियाओं को भी इस डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जा रहा है, जिससे कर्मचारियों के समय की बचत होगी और पूरा रिकॉर्ड प्रबंधन पहले की तुलना में कहीं अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी हो सकेगा।

प्रशासनिक स्वीकृतियों के कारण प्रोजेक्ट में हुआ विलंब

कॉलेज की प्राचार्य डॉ. अनामिका जैन ने इस संबंध में बताया कि कॉलेज प्रशासन से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस महत्वाकांक्षी ऑटोमेशन प्रोजेक्ट पर पिछले काफी समय से काम चल रहा है। प्रबंधन का मुख्य लक्ष्य यही है कि नए सत्र की शुरुआत के साथ ही छात्रों के लिए अधिकांश डिजिटल सेवाएं लाइव कर दी जाएं। इस ऑनलाइन व्यवस्था को काफी पहले ही शुरू करने की योजना बनाई गई थी, लेकिन कॉलेज प्रशासन इस प्रकार की संवेदनशील और बड़ी व्यवस्थाओं को किसी भी निजी एजेंसी के माध्यम से सीधे तौर पर लागू नहीं कर सकता है। इसके लिए शासकीय नियमानुसार विभिन्न स्तरों पर आवश्यक अनुमतियां लेना अनिवार्य था। इन्हीं विभिन्न प्रशासनिक स्वीकृतियों को प्राप्त करने में समय लगा, जिसके कारण पूरी प्रक्रिया में थोड़ा विलंब हुआ है। उन्होंने आगे जानकारी दी कि जन सहयोग समिति की बैठक बहुत जल्द ही प्रस्तावित है और वहां से अंतिम मंजूरी मिलते ही इस ऑटोमेशन सिस्टम को पूरी तरह से धरातल पर लागू कर दिया जाएगा।

नए सत्र से प्रारंभ होंगे दो विशेष पाठ्यक्रम

डिजिटलाइजेशन के साथ-साथ होलकर साइंस कॉलेज अपने शैक्षणिक दायरे का भी विस्तार कर रहा है। नए सत्र से कॉलेज में एमए योग और एमएससी बायो इन्फॉर्मेटिक्स नामक दो नए रोजगारोन्मुखी कोर्स शुरू किए जा रहे हैं। सीटों के निर्धारण की बात करें तो एमए योग में कुल 40 सीटें और एमएससी बायो इन्फॉर्मेटिक्स में 80 सीटें रखी गई हैं। इन दोनों ही पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों का प्रवेश उच्च शिक्षा विभाग की सेंट्रलाइज्ड ऑनलाइन मेरिट प्रक्रिया के माध्यम से संपन्न किया जाएगा। कॉलेज प्रबंधन के मुताबिक इन विशिष्ट कोर्सेज की मांग छात्रों द्वारा लंबे समय से की जा रही थी। संस्थान पिछले पांच वर्षों में बीएससी और एमएससी स्तर पर 10 से अधिक नए स्पेशलाइजेशन कोर्सेज सफलतापूर्वक शुरू कर चुका है। कॉलेज की बढ़ती प्रतिष्ठा के कारण यहां प्रवेश के लिए प्रतिस्पर्धा भी लगातार कठिन होती जा रही है, जहां कुछ मुख्य पाठ्यक्रमों में कट ऑफ 90 प्रतिशत से अधिक तक पहुंच जाता है, वहीं अधिकांश विषयों में दाखिले के लिए 80 से 90 प्रतिशत के बीच अंक लाना अनिवार्य होता है।



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