मुख्यमंत्री मोहन यादव ने गुरुवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में वन विभाग की गतिविधियों और योजनाओं की समीक्षा करते हुए वन संपदा और वन्यजीवों के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने वन अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए टाइगर स्ट्राइक फोर्स की तर्ज पर राज्य स्तरीय टास्क फोर्स गठित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। साथ ही वन एवं वन्यजीवों की निगरानी के लिए वन मुख्यालय में कमांड एंड कंट्रोल रूम स्थापित करने को भी स्वीकृति प्रदान की। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश की पहचान उसकी समृद्ध जैव विविधता, वन संपदा और वन्यजीवों से है। इनके संरक्षण के लिए दीर्घकालिक और प्रभावी प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने वन पर्यटन को बढ़ावा देने, पर्यटकों के लिए सुविधाएं बढ़ाने, होम स्टे को प्रोत्साहित करने और सफारी वाहनों की संख्या बढ़ाने के निर्देश भी दिए। 

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आंध्रप्रदेश से वाइल्ड डॉग्स लाएंगे 

बैठक में मुख्यमंत्री ने बताया कि आंध्रप्रदेश सरकार ने मध्यप्रदेश से बाघ और गौर उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। उन्होंने अधिकारियों को इस दिशा में कार्रवाई करने और बदले में आंध्रप्रदेश से वाइल्ड डॉग्स या अन्य वन्यजीव प्राप्त करने के प्रयास करने को कहा। वहीं राजस्थान सरकार से सोन चिड़िया प्राप्त कर उन्हें घाटीगांव और गांधीसागर अभयारण्यों में छोड़ने की तैयारी भी की जा रही है। 

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32 चीतों का जन्म कूनो राष्ट्रीय उद्यान में हुआ 

प्रमुख सचिव वन संदीप यादव ने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में 52 चीते हैं, जिनमें से 32 का जन्म कूनो राष्ट्रीय उद्यान में हुआ है। गांधीसागर अभयारण्य में जुलाई 2026 में एक नर और एक मादा चीता छोड़ने की योजना है। उन्होंने बताया कि बाघ, चीता, तेंदुआ, भेड़िया, घड़ियाल और गिद्धों के संरक्षण के मामले में मध्यप्रदेश देश में अग्रणी है।

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तेंदूपत्ता संग्राहकों को 710.71 करोड़ वितरित किए जाएंगे 

बैठक में मानव-वन्यजीव संघर्ष को राज्य आपदा घोषित करने के प्रयासों पर भी चर्चा हुई, ताकि ऐसी घटनाओं में प्रशासन, पुलिस, वन विभाग और आपदा प्रबंधन दल मिलकर बेहतर तरीके से कार्रवाई कर सकें। इसके अलावा प्रदेश में वन्यजीव बचाव केंद्रों के निर्माण, हाथियों की निगरानी के लिए रेडियो कॉलर लगाने, सहायक महावतों की संख्या बढ़ाने तथा वन ग्रामों को राजस्व ग्राम में परिवर्तित करने की योजनाओं की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष 17.76 लाख मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहित हुआ है और संग्राहकों को 710.71 करोड़ रुपये बोनस के रूप में वितरित किए जाएंगे।



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