बिहार के मधुबनी से गिरफ्तार किए गए संदिग्ध आतंकी मौलाना इजहार-उल-हक को 22 जून तक एटीएस रिमांड पर भेजा गया है। जांच एजेंसियों के अनुसार इजहार आतंकी नेटवर्क के लिए फंडिंग की व्यवस्था करता था। उससे बिहार और उत्तर प्रदेश एटीएस की टीमें भी पूछताछ कर रही हैं। वहीं, एमपी एटीएस की एक टीम उत्तर प्रदेश के सहारनपुर और देवबंद में उसके संपर्कों की जांच में जुटी है।

एटीएस सूत्रों के अनुसार, 56 वर्षीय मौलाना इजहार-उल-हक को 16 जून को बिहार के मधुबनी जिले के नौतोले क्षेत्र से देशविरोधी गतिविधियों और संदिग्ध आतंकी नेटवर्क से जुड़े होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इस कार्रवाई को बेहद गोपनीय तरीके से अंजाम दिया गया। एटीएस की टीम एक निकाह समारोह में मेहमान बनकर पहुंची और मौके पर उसे हिरासत में ले लिया। गिरफ्तारी के बाद इजहार को अदालत में पेश किया गया था, जहां पहले उसे 20 जून तक की रिमांड पर भेजा गया था। बाद में जांच एजेंसियों की मांग पर अदालत ने रिमांड अवधि बढ़ाकर 22 जून कर दी।

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स्लीपर सेल तैयार करने का आरोप

एटीएस के अनुसार, इजहार पाकिस्तानी हैंडलरों के निर्देश पर देश में स्लीपर सेल तैयार करने के मिशन पर काम कर रहा था। आरोप है कि वह अपने नेटवर्क के जरिए युवाओं तक कट्टरपंथी सामग्री और भड़काऊ भाषण पहुंचाता था। जांच एजेंसियां उससे पाकिस्तानी संपर्कों, अफगानिस्तान के एक संदिग्ध मोबाइल नंबर, जिहादी साहित्य और फंडिंग के स्रोतों के संबंध में पूछताछ कर रही हैं।

कई राज्यों तक फैले हो सकते हैं नेटवर्क के तार

भोपाल के काजी कैंप क्षेत्र से पहले गिरफ्तार किए गए संदिग्ध आतंकी फराज से पूछताछ में इजहार को लेकर कई अहम सुराग मिले थे। जांच में सामने आया कि इजहार पढ़ाई के लिए देवबंद गया था, जहां उसकी मुलाकात सहारनपुर निवासी नईम कुरैशी उर्फ अब्दुल्ला से हुई थी।

अब एटीएस इजहार का सामना नईम और शाकिब से भी करा सकती है। जांच एजेंसियों का दावा है कि पूछताछ में कई अहम जानकारियां मिली हैं। एजेंसियों को आशंका है कि इस कथित आतंकी नेटवर्क के तार केवल मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि महाराष्ट्र सहित दक्षिण भारत के कई राज्यों तक फैले हो सकते हैं।



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