प्रदेशभर के सरकारी स्कूलों और कार्यालयों से ई-अटेंडेंस प्रणाली को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। कई शिक्षक और कर्मचारी निर्धारित समय पर कार्यस्थल पर पहुंचने के बावजूद अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं करा पा रहे हैं। तकनीकी गड़बड़ी के कारण ऐप वास्तविक लोकेशन की जगह कर्मचारियों को कई किलोमीटर दूर दिखा रहा है। सामने आए एक मामले में शिक्षक विद्यालय परिसर में मौजूद था और फेस वेरिफिकेशन भी सफलतापूर्वक हो गया, लेकिन सिस्टम ने उसे स्कूल से करीब 2165 मीटर दूर बताया। इसके चलते लगातार दो दिन तक उसकी उपस्थिति दर्ज नहीं हो सकी।
तकनीकी खामी का खामियाजा क्यों भुगतें कर्मचारी?
शासकीय शिक्षक संगठन ने सवाल उठाया है कि जब कर्मचारी समय पर स्कूल या कार्यालय में मौजूद है तो तकनीकी त्रुटि के कारण उसे अनुपस्थित कैसे माना जा सकता है। संगठन का कहना है कि यदि ई-अटेंडेंस को अनिवार्य बनाया गया है तो विभाग की जिम्मेदारी है कि सभी स्कूलों और कार्यालयों की लोकेशन सही तरीके से मैप हो तथा तकनीकी समस्याओं का तत्काल समाधान किया जाए।
अतिथि शिक्षकों की बढ़ी मुश्किले
ई-अटेंडेंस की सबसे बड़ी मार अतिथि शिक्षकों पर पड़ती दिखाई दे रही है। अतिथि शिक्षकों का आरोप है कि पिछले सत्र में कई बार तकनीकी कारणों से उनकी उपस्थिति दर्ज नहीं हो सकी, जिसके चलते उनका वेतन आज तक लंबित है। उनका कहना है कि नियमित शिक्षकों को ऑफलाइन प्रक्रिया के माध्यम से वेतन मिल गया, लेकिन अतिथि शिक्षकों को भुगतान के लिए अब भी इंतजार करना पड़ रहा है।
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स्कूलों में अनुपस्थिति रोकने के लिए शुरू हुई थी व्यवस्था
गौरतलब है कि प्रदेश के कई स्कूलों से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ शिक्षक समय पर स्कूल नहीं पहुंचते और कई बार बिना सूचना के अनुपस्थित रहते हैं। इसी पर अंकुश लगाने के लिए शिक्षा विभाग ने पिछले सत्र से ई-अटेंडेंस प्रणाली लागू की थी। हालांकि शुरुआत से ही इस व्यवस्था को लेकर विरोध और सवाल उठते रहे हैं। नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ अब ई-अटेंडेंस की तकनीकी खामियां बड़ी समस्या बनकर सामने आई हैं। शिक्षक संगठनों का कहना है कि सिस्टम की त्रुटियों के कारण कर्मचारियों के सेवा रिकॉर्ड और वेतन पर असर पड़ रहा है, जो चिंता का विषय है।
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शिक्षक संगठन ने उठाई ये मांगें
शासकीय शिक्षक संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने मांग की है कि ई-अटेंडेंस प्रणाली की सभी तकनीकी खामियों को तत्काल दूर किया जाए, गलत लोकेशन मैपिंग को सुधारा जाए और जब तक व्यवस्था पूरी तरह सुचारु नहीं हो जाती, तब तक कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए वैकल्पिक व्यवस्था लागू की जाए। संगठन ने स्पष्ट कहा है कि तकनीकी गड़बड़ियों के आधार पर किसी भी शिक्षक या कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।
