नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। वर्षा की पहली फुहार के साथ ही शहर के आसपास के पिकनिक स्पॉट, बांध और वाटर फॉल लोगों को आकर्षित करने लगते हैं, लेकिन यही आकर्षण ग्वालियर में जानलेवा साबित हो रहा है। हाल ही में तिघरा बांध के प्रतिबंधित क्षेत्र में गजराजा मेडिकल कॉलेज (जीआरएमसी) के दो छात्रों की डूबने से हुई दर्दनाक मौत ने एक बार फिर प्रशासन के सुरक्षा दावों की पोल खोल दी है। यह कोई पहला मामला नहीं है।

हर साल ऐसे हादसे तिघरा बांध से लेकर दूसरे वाटर फॉल और शहर के आउटर में स्थित खुली पड़ी खदानों में होते हैं। 22 दिन में सिर्फ तिघरा बांध में डूबने से ही चार मौत हो चुकी हैं। अब मानसून भी दस्तक देने वाला है और ऐसे में वर्षा के मौसम में लोग पिकनिक मनाने के लिए इन स्पॉट पर पहुंचना शुरू हो जाएंगे। हर साल लोगों की जान जाती है, लेकिन न सिस्टम को परवाह है न ही जनता ही आम लोग भी ऐसे स्थानों पर जाने के दौरान सावधानी व नियमों का पालन करते हैं। इस कारण हादसे बार-बार होते हैं।

प्रतिबंधित क्षेत्रों में आसानी से एंट्री, सुरक्षा के इंतजाम नाकाफी

तिघरा बांध, सुल्तानगढ़ वाटरफॉल, वीरपुर बांध, भदावना या अन्य कोई ऐसा पिकनिक स्पॉट जहां झरना गिर रहा है। यहां सुरक्षा के इंतजाम नाकाफी हैं। न तो प्रतिबंधित क्षेत्रों पर कोई सुरक्षा पहरा होता है। संकेतक तक नहीं हैं। इस कारण कई बार लोगों को पता ही नहीं होता। वह ऐसे प्रतिबंधित स्थान पर पहुंच जाते हैं और पानी में डूब जाते हैं। सबसे ज्यादा भीड़ तिघरा बांध पर ही पहुंचती है और यहां ही सुरक्षा के इंतजाम पर्याप्त नहीं हैं।

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रील और वीडियो की दीवानगी में बढ़ रहे हादसे

  • जिन क्षेत्रों को ‘प्रतिबंधित’ घोषित किया गया है, वहां न तो पर्याप्त सुरक्षाकर्मी तैनात हैं और न ही मजबूत फेंसिंग की गई है।
  • कुछ जगहों पर चेतावनी बोर्ड तो लगे हैं, लेकिन वे महज औपचारिकता बनकर रह गए हैं। लोग सेल्फी लेने और रील बनाने के चक्कर में मौत के मुहाने तक पहुंच जाते हैं।

मौत का दूसरा नाम बनीं आउटर की खुली खदानें

शहर के बाहरी इलाकों में स्थित पत्थर और मुरम की खुली खदानें मानसून में सबसे बड़ा खतरा बन जाती हैं। वर्षा का पानी भरने से ये खदानें ऊपर से शांत और सुंदर तालाब जैसी दिखती हैं, लेकिन इनके नीचे सैकड़ों फीट गहरा गड्ढा और खतरनाक दलदल होता है। इसमें डूबकर हर साल ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के युवाओं की जान जाती है। नियमानुसार खनन के बाद इन खदानों को समतल किया जाना चाहिए या इनकी फेंसिंग होनी चाहिए, लेकिन खदान माफिया और जिम्मेदार विभाग इस ओर से आंखें मूंदे बैठे हैं।

कहां हैं खुली खदानें: शताब्दीपुरम, शंकरपुर, पुरानी छावनी, बरा, पनिहार।

सिस्टम के साथ आम जनता को भी होगा संभलना: इन हादसों को रोकने के लिए सिस्टम के साथ आम जनता को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।

प्रशासन को क्या करना चाहिए

सभी पिकनिक स्पाट और खदानों पर पुलिस बल या होमगार्ड की तैनाती हो। खदानों को बंद कराना चाहिए। संबंधित विभागों के अधिकारियों की संयुक्त बैठक कर प्लानिंग होनी चाहिए।

जनता से अपील

पिकनिक मनाएं, लेकिन पानी के करीब जाते समय बेहद सतर्क रहें। पानी की अधिक गहराई और प्रतिबंधित क्षेत्रों से दूर रहकर ही मानसून का आनंद लें। आपकी एक लापरवाही पूरे परिवार की खुशियां उजाड़ सकती है।



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