मध्य प्रदेश कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने राज्यसभा चुनाव में मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज किए जाने के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान कांग्रेसियों ने राष्ट्रपति भवन की ओर मार्च किया। पुलिस के साथ जमकर झूमाझटकी देखने को मिली। प्रदर्शनकारियों को काबू में करते हुए पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।

वहीं, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि न डरेंगे, न रुकेंगे। संविधान की शपथ लेकर सत्ता में आए प्रधानमंत्री आज चुन-चुनकर संविधान के एक-एक पन्ने को कमजोर करने में लगे हैं। नरेंद्र मोदी के नए भारत में लोकतंत्र आखिरी सांसें ले रहा है। नरेंद्र मोदी जी, जुबान तो पकड़ लेंगे, लेकिन आवाज कैसे पकड़ेंगे?

हमारा आंदोलन जारी रहेगा-जयवर्धन सिंह


पार्टी विधायक जयवर्धन सिंह ने कहा कि आप देख सकते हैं कि भाजपा ने देश में किस तरह तानाशाही घोषित कर दी है। मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र स्वीकार किया जाना चाहिए था। हम चुनाव आयोग के पास गए, लेकिन हमें न्याय नहीं मिला। सुप्रीम कोर्ट ने भी हमें समय नहीं दिया। जब तक मीनाक्षी नटराजन को न्याय नहीं मिल जाता, तब तक हमारा आंदोलन जारी रहेगा। गौरलतब है कि आज सुप्रीम कोर्ट के फैसले के पहले कांग्रेस के दिल्ली स्थित मुख्य कार्यालय में एमपी कांग्रेस ने एक बड़ी प्रेसवार्ता भी की थी।

‘आज तमाम संवैधानिक व्यवस्थाओं को कमजोर कर दिया गया’

इस बीच प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने कहा कि देश के सामने एक सवाल था कि क्या देश ऑटोक्रेसी की तरफ जा रहा है, मगर आज उस सवाल का जवाब देश को मिल चुका है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग संवैधानिक व्यवस्था के तहत निष्पक्ष होना चाहिए, लेकिन इस व्यवस्था को बदल दिया गया है। नरेंद्र मोदी ने चुनाव आयोग के कमिश्नर को चुनने की प्रक्रिया से देश के मुख्य न्यायाधीश को हटाकर अपने एक मंत्री को उसमें शामिल किया। इस व्यवस्था परिवर्तन के बाद सरकार जिसे चाह रही है, उसे नियुक्त कर रही है। आज तमाम संवैधानिक व्यवस्थाओं को कमजोर कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक मॉडल के तहत राज्यसभा चुनाव के लिए मीनाक्षी नटराजन जी ने नामांकन भरा था। नियम-कानूनों के अनुसार नामांकन दाखिल किया गया था, लेकिन बाद में उसे निरस्त कर दिया गया।

‘देश इलेक्टोरल ऑटोक्रेसी की ओर बढ़ रहा’

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि देश में जिस प्रकार की परिस्थितियां बन रही हैं, उसके कारण देश इलेक्टोरल ऑटोक्रेसी की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि स्वीडन की एक यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट में भी बताया गया है कि विश्व के कई देश चुनावी सत्तावाद की ओर बढ़ रहे हैं, जहां केवल नाम का विपक्ष और नाम की स्वतंत्र मीडिया बचती है।

उन्होंने कहा कि कार्यपालिका का केंद्रीकरण, विधायिका की कमजोर निगरानी, आम नागरिकों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक और पत्रकारों के उत्पीड़न जैसे हालात आज देश में देखने को मिल रहे हैं। इन परिस्थितियों पर गंभीर चिंतन करने की आवश्यकता है।

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नामांकन फॉर्म में कोई कमी नहीं थी- मीनाक्षी नटराजन

राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि उन पर राज्यसभा नामांकन के फॉर्म-26 में जानकारी छिपाने का आरोप लगाया गया, जबकि फॉर्म-26 में राजनीतिक दल की जानकारी, मतदाता सूची में क्रमांक, संपर्क विवरण, पैन एवं आयकर रिटर्न, संपत्ति का विवरण, लंबित आपराधिक मामलों एवं दोष सिद्ध मामलों की जानकारी मांगी जाती है।

उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह स्पष्ट है कि न तो नामांकन फॉर्म में कोई कमी थी और न ही मांगी गई किसी जानकारी को छिपाया गया था। फॉर्म-26 के तहत जो भी जानकारी अपेक्षित थी, वह पूरी पारदर्शिता के साथ प्रस्तुत की गई।



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