प्रदेश सरकार ने शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर चल रही हीलाहवाली को पूरी तरह खत्म करते हुए अब मासिक वेतन भुगतान को सीधे ऑनलाइन उपस्थिति यानी ई-अटेंडेंस स …और पढ़ें

HighLights
- एमपी में ‘हमारे शिक्षक ऐप’ पर हाजिरी के बिना नहीं मिलेगी सैलरी
- वेतन भुगतान को ई-अटेंडेंस से जोड़ा, लापरवाही पर नपेंगे अफसर
- सॉफ्टवेयर खुद ही काटेगा बिना गायब रहने वाले शिक्षकों का वेतन
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुधारने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने अब तक का सबसे सख्त कदम उठाया है। प्रदेश सरकार ने शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर चल रही हीलाहवाली को पूरी तरह खत्म करते हुए अब मासिक वेतन भुगतान को सीधे ऑनलाइन उपस्थिति यानी ई-अटेंडेंस से जोड़ दिया है। लोक शिक्षण संचालनालय के आयुक्त अभिषेक सिंह द्वारा जारी नए आदेश के बाद अब ग्वालियर सहित पूरे प्रदेश में हड़कंप की स्थिति है। साफ कर दिया गया है कि ‘हमारे शिक्षक ऐप’ पर दर्ज हाजिरी के बिना अब शिक्षकों की जेब खाली रहेगी।
पिछली बार की मौखिक सख्ती और नए कड़े नियम
गौरतलब है कि शैक्षणिक सत्र 2025-26 में भी लोक शिक्षण विभाग ने ‘हमारे शिक्षक ऐप’ से उपस्थिति लगाने के निर्देश दिए थे। हालांकि, पिछले सत्र में इस व्यवस्था को सीधे वेतन भुगतान सॉफ्टवेयर से नहीं जोड़ा गया था। उस दौरान स्थानीय स्तर के प्रशासनिक अफसरों ने केवल मौखिक निर्देशों के आधार पर ऐप पर उपस्थिति न लगाने वाले कुछ शिक्षकों का वेतन काट दिया था, जिसे बाद में मानवीय आधार पर वापस भी जारी कर दिया गया था। लेकिन, इस बार नियमों में कोई ढील नहीं होगी। आयुक्त के नए आदेश के मुताबिक, अब ब्लॉक और जिला स्तर के शिक्षा अधिकारियों को वेतन बिल (आहरण देयक) अनिवार्य रूप से ई-अटेंडेंस के डेटा के आधार पर ही जनरेट करने होंगे।
ग्वालियर के 6,500 से अधिक शिक्षकों पर सीधा असर
नवे (नए) नियम का सीधा असर जिले के विभिन्न शासकीय स्कूलों में कार्यरत 6,500 से अधिक शिक्षकों और शैक्षणिक स्टाफ पर पड़ने जा रहा है। जिले में पिछले साल का ट्रैक रिकॉर्ड देखें, तो सत्र की शुरुआत में ई-अटेंडेंस का प्रतिशत बेहद निराशाजनक था, तब महज 25 से 30 प्रतिशत शिक्षक ही ऐप के जरिए हाजिरी लगा रहे थे। हालांकि, बाद में जब जिला प्रशासन और जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने सख्ती दिखाई, तो यह आंकड़ा सुधरकर 85 प्रतिशत तक पहुंच गया था। अब इस नए आदेश के बाद विभाग का लक्ष्य जिले में शत-प्रतिशत ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराना है।
लापरवाही पर संकुल प्राचार्यों की तय होगी व्यक्तिगत जिम्मेदारी
शिक्षा विभाग ने एजुकेशन पोर्टल 3.0 पर शिक्षकों की सुविधा के लिए इस ‘हमारे शिक्षक ऐप’ को अपग्रेड किया है। नए आदेश में जिले के सभी विकासखंड शिक्षा अधिकारियों और संकुल प्राचार्यों को चेतावनी दी गई है। शाला संकुल प्राचार्यों की यह जिम्मेदारी होगी कि वे ई-अटेंडेंस के मिलान के बाद ही वेतन आहरण देयक तैयार करें। यदि किसी शिक्षक की ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं है और उसका बिल पास कर दिया जाता है, तो इसके लिए संबंधित संकुल प्राचार्य को सीधे तौर पर दोषी माना जाएगा और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
