बस यात्रा के दौरान फिल्मी अंदाज में गायब हुए 1.75 लाख रुपये नकद और महत्वपूर्ण दस्तावेजों से भरे बैग को इंगोरिया पुलिस ने महज एक घंटे में खोजकर उसके मालिक को वापस सौंप दिया। पुलिस की तत्परता से आगरा के व्यापारी पिता-पुत्र को बड़ी राहत मिली।
जानकारी के अनुसार, 6 जून 2026 को आगरा के बेलगंज निवासी विनोद अग्रवाल अपने पुत्र ध्रुव अग्रवाल के साथ उज्जैन से बदनावर जा रहे थे। ध्रुव आयुर्वेदिक दवाओं की मार्केटिंग का कार्य करते हैं। दोनों डी.के. यादव बस से सफर कर रहे थे। बस में अधिक भीड़ होने के कारण ध्रुव ने 1 लाख 75 हजार रुपये नकद और कंपनी के महत्वपूर्ण दस्तावेजों से भरा बैग सीट के ऊपर बने केबिन में रख दिया।
इंगोरिया के पास सीट खाली होने पर जब ध्रुव बैठने के लिए पहुंचे और ऊपर रखा बैग देखा तो उनके होश उड़ गए। उनका बैग गायब था और उसकी जगह हूबहू वैसा ही दूसरा बैग रखा हुआ था। बैग में कंपनी का कलेक्शन और जरूरी दस्तावेज होने के कारण पिता-पुत्र घबरा गए और तुरंत थाना इंगोरिया पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई।
सूचना मिलते ही थाना प्रभारी दीपेश व्यास के निर्देशन में पुलिस टीम सक्रिय हुई। उपनिरीक्षक नानकराम पटेल, सहायक उपनिरीक्षक दिनेश निनामा, आरक्षक नितेश रायकवार, भोजराज परमार और दीपक सोलंकी ने गौतमपुरा मार्ग पर घेराबंदी शुरू की। इसी दौरान न्यू ब्रिज इंगोरिया के पास एक युवक उसी तरह का बैग लेकर उतरता दिखाई दिया। पुलिस ने उसे रोककर पूछताछ की और बैग की जांच की। बैग में पूरे 1.75 लाख रुपये नकद और ध्रुव के सभी दस्तावेज सुरक्षित मिले।
गलती से बदल गया था बैग
पूछताछ में युवक ने बताया कि दोनों बैग एक जैसे थे। भीड़भाड़ के दौरान वह गलती से ध्रुव का बैग उठा लाया था। उसकी नीयत गलत नहीं थी और उसने बैग खोलकर भी नहीं देखा था। पूरी जांच और तस्दीक के बाद पुलिस ने बैग उसके वास्तविक मालिक ध्रुव अग्रवाल को सौंप दिया।
बैग वापस मिलने पर ध्रुव अग्रवाल ने कहा कि उन्हें लगा था सब कुछ खत्म हो गया, लेकिन मध्य प्रदेश पुलिस ने एक घंटे के भीतर उनका बैग बरामद कर लिया। नकदी के साथ-साथ व्यवसाय से जुड़े महत्वपूर्ण मूल दस्तावेज भी सुरक्षित मिल गए। उन्होंने उज्जैन पुलिस का आभार व्यक्त किया।
