इंदौर नगर निगम के बजट सत्र के दौरान वंदे मातरम् नहीं गाने को लेकर कांग्रेस पार्षद फोजिया शेख अलीम और रुबीना इकबाल खान विवादों में आ गई थीं। यह मामला काफी सुर्खियों में रहा, जिसके बाद भाजपा ने कांग्रेस को इस मुद्दे पर जमकर घेरा।
भाजपा पार्षदों की शिकायत पर इंदौर के एमजी रोड थाने में फोजिया शेख अलीम और रुबीना इकबाल खान के खिलाफ धार्मिक भावनाएं आहत करने संबंधी प्रकरण दर्ज किया गया। पुलिस ने दोनों पार्षदों को नोटिस जारी कर अपना पक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे, लेकिन निर्धारित समय तक उनकी ओर से कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया।
इसी बीच कांग्रेस पार्षद फोजिया शेख अलीम ने जिला न्यायालय में अग्रिम जमानत याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान पुलिस की ओर से अपर लोक अभियोजन अधिकारी अभिजीत सिंह राठौर ने याचिका का विरोध करते हुए इसे निरस्त करने की मांग की।
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अदालत में अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि फोजिया शेख अलीम ने वंदे मातरम् गाने से इनकार करते हुए इसे अपने धार्मिक विश्वासों से जोड़ा था। साथ ही उनके कुछ कथित बयानों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को भी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने अभियोजन पक्ष के तर्कों को ध्यान में रखते हुए फोजिया शेख अलीम की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने उन्हें पुलिस जांच में पूरा सहयोग करने के निर्देश भी दिए।
मामले में दर्ज धाराओं के तहत अधिकतम तीन वर्ष की सजा का प्रावधान है। ऐसे मामलों में पुलिस आरोपियों को नोटिस देकर जांच में शामिल होने के लिए बुला सकती है। न्यायालय ने भी पुलिस को कानून के अनुसार कार्रवाई करते हुए दोनों पार्षदों से जांच में सहयोग लेने के निर्देश दिए हैं। फिलहाल अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर सभी की नजर बनी हुई है।
