नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। शहर में साइबर ठगी की रकम से सराफा कारोबारी कुणाल पुत्र त्रिलोकचंद्र जैन को ठगने का बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। शातिर ठग ने किसी और से ठगी गई रकम का इस्तेमाल कर मुरार के सराफा कारोबारी से सोने के सिक्के खरीद लिए। व्यापारी के बैंक खाते में 3.31 लाख रुपये आरटीजीएस के जरिये भेजे गए। लेकिन व्यापारी जिसे सामान्य खरीदार समझ रहा था, वह शातिर ठग निकला।
व्यापारी को खुद के साथ हुए फर्जीवाड़े का पता तब लगा, जब साइबर अपराध की रिपोर्ट के बाद व्यापारी का ही खाता लीन कर दिया गया। बैंक में जाने पर पता लगा कि उनके खाते में जो 3.31 लाख रुपये पहुंचे हैं, वह साइबर ठगी की रकम है। व्यापारी के पैरों तले जमीन खिसक गई।
शिकायत पर मुरार थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज की
अब व्यापारी की शिकायत पर मुरार थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। एफआईआर तो दर्ज कर ली गई है, लेकिन इस शातिर ठग तक पहुंचना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती है। क्योंकि जिस बैंक खाते का इस्तेमाल आरटीजीएस के जरिये किया गया, वह म्यूल खाता है। जिसका खाताधारक कोई और है। फिलहाल पुलिस तकनीकी साक्ष्यों की मदद से पड़ताल कर रही है।
पढ़िए… ठगी की पूरी कहानी, व्यापारी की जुबानी
मेरी मुरार के सदर बाजार में भीकाराम त्रिलोकचंद्र सर्राफ के नाम से सोना-चांदी के गहनों की दुकान है। 25 मई को करीब दोपहर तीन बजे दुकान पर एक व्यक्ति आया। उसने अपना नाम जय वर्मा बताया। उसने उपहार में देने के लिए सोने के सिक्के दिखाने को कहा।
20 ग्राम के सोने के सिक्के उसने खरीदे, जिनकी कीमत करीब 3.31 लाख रुपये थी। उसने भुगतान आरटीजीएस के जरिये करने की बात कही। मैंने अपने बैंक ऑफ इंडिया के खाता क्रमांक 94522011000341 में भुगतान ले लिया।
दो दिन बाद बैंक से मेरे पास संदेश आया कि मेरा खाता लीन कर दिया गया है। मैं बैंक शाखा पहुंचा। यहां पता लगा कि जो 3.31 लाख रुपये मेरे खाते में आए हैं, वह ठगी की रकम है। साइबर ठगी के पैसे से खरीदारी की गई थी। मैंने तुरंत इसकी शिकायत मुरार थाने में की। अब इस मामले में एफआइआर दर्ज हुई है। आवेदन तब से लंबित था।
पुलिस की कार्रवाई पर सवाल, 19 दिन बाद एफआईआर
इस मामले में आरोपित का मोबाइल नंबर 8965983328 पुलिस को फरियादी द्वारा दिया गया था। बैंक से जानकारी मिलते ही इसकी शिकायत भी कर दी गई थी। लेकिन पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने में ही 19 दिन का समय लगा दिया।
अगर समय पर पड़ताल की जाती, तो संभव है कि अंतरराज्यीय म्यूल खातों और साइबर ठगों के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हो जाता। लेकिन मुरार पुलिस ने समय पर एफआइआर तक दर्ज नहीं की।
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