इंदौर में उत्पन्न जलसंकट को लेकर अभ्यास मंडल ने मेयर के साथ ‘जल संवाद’ आयोजित किया। इस दौरान जल संकट से निपटने के उपायों और शहर की जल व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा हुई।

मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि इंदौर बूंद-बूंद के लिए नहीं तरस रहा है। जलसंकट को लेकर शहर की छवि खराब नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2029 तक शहर को 450 से बढ़ाकर 900 एमएलडी पानी उपलब्ध होगा। उन्होंने बताया कि शहर में पांच नई कॉलोनियां बनी हैं और 29 गांवों के 10 वार्ड नर्मदा जल से वंचित थे। कई कॉलोनियां बोरिंग पर निर्भर थीं। इसे देखते हुए निगम ने वाटर मैनेजमेंट पर काम किया है। तालाबों की चैनलों की भी सफाई कराई गई है।

अपर आयुक्त आशीष पाठक ने बताया कि शहर के 32 प्रतिशत क्षेत्र में नर्मदा की पाइपलाइन नहीं पहुंची है। उन कॉलोनियों में फिलहाल टैंकरों के जरिए पानी पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि शहर को नर्मदा से प्रतिदिन 382 एमएलडी पानी मिल रहा है, लेकिन बोरिंग सूखने की वजह से पानी की मांग बढ़ गई है। जल संवाद के दौरान कई विशेषज्ञों ने अपने सुझाव भी रखे।

पढ़ें:  मौत से पहले के हर मिनट का हिसाब जुटा रही सीबीआई, आमने-सामने होंगे सास गिरिबाला और पति समर्थ

दिलीप वाघेला ने कहा कि पहले हाइड्रेंट से पर्याप्त पानी मिलता था, लेकिन अब उनमें भी पानी नहीं है। उनके आसपास निगम को वाटर रिचार्जिंग का काम करना चाहिए। पत्रकार अरविंद तिवारी ने कहा कि शहर की जल वितरण प्रणाली को दुरुस्त करने की जरूरत है। शहर में पानी से जुड़े कई विशेषज्ञ मौजूद हैं और निगम को उनके अनुभव का लाभ लेना चाहिए।

गुरुसिंघ सभा के मोनू भाटिया ने कहा कि सिख समाज ने 100 से अधिक स्थानों पर वाटर रिचार्जिंग करने का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि सभी गुरुद्वारों में वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था पहले से मौजूद है। वैज्ञानिक सुधीर मोहन शर्मा ने कहा कि जिन इलाकों में नलकूप सूख गए हैं, निगम उन्हें हॉटस्पॉट मानकर वहां विशेष काम करे।

मुकेश चौहान ने कहा कि गर्मी के दिनों में बोरिंग पर प्रतिबंध लगाया जाता है, जबकि मई में कराए गए बोरिंग सूखते नहीं हैं। उन्होंने कहा कि बारिश के दिनों में होने वाले बोरिंग भी नहीं सूख रहे हैं। गोविंद अग्रवाल ने सुझाव दिया कि कैचमेंट एरिया से सख्ती के साथ अतिक्रमण हटाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शहर की कई ग्रीन बेल्ट की जमीनों पर अतिक्रमण है। शंकर लाल गर्ग ने कहा कि कुएं-बावड़ियों में ब्लीचिंग पाउडर और जामुन के पेड़ों की छाल डालने से पानी साफ रह सकता है। सुमित सूरी ने कहा कि वाटर रिचार्जिंग को जनभागीदारी से जोड़ा जाना चाहिए।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *