लव जिहाद, तीन तलाक सहित अन्य विषयों पर दो सौ से ज्यादा जनहित याचिकाएं लगा चुके दिल्ली निवासी वकील अश्विनी उपाध्याय ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले के बाद धार भोजशाला को मंदिर घोषित किया गया है। अब सरकार को महाकाल लोक की तर्ज पर धार में सरस्वती लोक  विकसित करना चाहिए। मांडव, इंदौर और उज्जैन के समीप होने के कारण धार में धार्मिक पर्यटन की काफी संभावनाएं हैं।

उन्होंने कहा कि लंदन से मां वाग्देवी की मूर्ति वापस लाने में कोई बाधा नहीं आएगी और इसके लिए कोर्ट जाने की भी आवश्यकता नहीं होगी, क्योंकि संयुक्त राष्ट्र के समझौतों में यह स्पष्ट है कि जो देश दूसरे देशों से धार्मिक और पुरातात्विक महत्व की वस्तुएं ले गए हैं, उन्हें वापस लौटाना होगा। यदि भारत सरकार प्रयास करेगी, तो ब्रिटिश सरकार ऐसी वस्तुएं लौटाने के लिए बाध्य होगी।

 

उपाध्याय ने कहा कि 1991 में कांग्रेस सरकार ने पूजा स्थल अधिनियम बनाया था। उस समय अयोध्या को छोड़कर किसी अन्य मामले की सुनवाई अदालत में नहीं चल रही थी। उन्होंने बताया कि इस कानून को उन्होंने अदालत में चुनौती दी थी। इसके बाद अब तक 18 स्थानों पर सर्वे हो चुके हैं और कई जगह मंदिर होने के प्रमाण मिलने का दावा किया गया है। उनके अनुसार, किसी भी सरकार को ऐसा कानून बनाने का अधिकार नहीं है जो मुगलों और अंग्रेजों के गलत कार्यों को वैध ठहराए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने यह कानून बनाकर ऐसा ही किया।

 

उपाध्याय ने यह भी कहा कि मध्य प्रदेश का मालवा क्षेत्र लव जिहाद का बड़ा केंद्र बन चुका है। उनके अनुसार, मालवा पहले सिमी का गढ़ रहा है और अब उससे जुड़े अन्य संगठन सक्रिय हैं। उन्होंने “लव जिहाद” को आतंकवाद से भी अधिक खतरनाक बताते हुए इस पर कड़ी कार्रवाई की आवश्यकता बताई।   



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