नरवाई व पराली प्रबंधन के लिए जिले में 120 से अधिक किसानों ने हैपीसीडर मशीनें खरीदी भी हैं। फिर भी इस पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। …और पढ़ें

HighLights
- मुकदमा-जुर्माना व लोगों में जागरुकता के प्रयास भी नाकाफी
- मशीनों पर सब्सिडी, फिर भी लापरवाही
- आगामी सीजन में की जाएगी सख्त कार्रवाई
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। ग्वालियर-चंबल अंचल ही नहीं पूरे प्रदेश में गेहूं की फसल कट चुकी है। गेहूं की कटाई के साथ ही नरवाई जलाना शुरू हो गया था। अभी तक नरवाई जलाने के मामले में मध्यप्रदेश देश में सबसे आगे और प्रदेश में विदिशा व ग्वालियर-चंबल में गुना सबसे आगे है और ग्वालियर दूसरे नंबर पर है। ग्वालियर में नरवाई जलाने वाले 200 से अधिक किसानों पर 10 लाख रुपये का जुर्माना हो चुका है। बावजूद इसके नरवाई जलाने पर रोक नहीं लग पा रही है। हालांकि नरवाई व पराली प्रबंधन के लिए जिले में 120 से अधिक किसानों ने हैपीसीडर मशीनें खरीदी भी हैं। फिर भी इस पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।

मध्य प्रदेश देश में अव्वल
सैटेलाइट डेटा और हालिया रिपोर्टों के अनुसार, नरवाई जलाने के मामलों में मध्य प्रदेश पूरे देश में सबसे आगे बना हुआ है। प्रदेश में अभी तक 37 हजार 17 घटनाएं पराली जलाने की हो चुकी है। प्रदेश में सबसे आगे विदिशा रहा है, इसके बाद सिवनी, फिर उज्जैन रहा है। ग्वालियर-चंबल संभाग की स्थिति भी बेहद चिंताजनक है, जहां गुना जिला नरवाई की आग के मामलों में अंचल में पहले स्थान पर है, जबकि ग्वालियर दूसरे, अशोक नगर तीसरे नंबर पर रहा है।
उप संचालक कृषि ने कहा…
नरवाई जलाने से रोकने के लिए किसानों को समझाइश भी दी गई थी और रोका भी गया था। लेकिन फिर भी डबरा व भितरवार क्षेत्र के किसानों ने नरवाई जलाई। इन क्षेत्रों के दो सौ से अधिक किसानों पर 10 लाख से अधिक का जुर्माना किया गया है। हालांकि 120 किसानों को विभाग ने नरवाई प्रबंधन के लिए हैपीसीडर के लिए अनुदान भी दिया है। आगामी सीजन में किसानों पर और सख्ती की जाएगी। इससे नरवाई जलाने की घटना न हों। -आरबीरएस जाटव, उप संचालक कृषि।
