नईदुनिया प्रतिनिधि,ग्वालियर। पुलिस खुद को ईमानदार बताने के लिए क्या क्या कर सकती है किस हद तक जा सकती है, यही एक बड़ा कारनामा ग्वालियर पुलिस का सामने आया है। वाकया दतिया में पीएचडी छात्रा की आत्महत्या का है जिसने जिंदा रहते दुष्कर्म की एफआईआर के लिए एसएसपी कार्यालय से लेकर पड़ाव थाने तक चक्कर लगाए लेकिन असंवेदनशील पुलिस ने सुनी ही नहीं, आखिरकार उसने मौत चुन ली।

पीड़िता को थाने पर अपने जीजा के साथ बताया उपस्थित

यही ग्वालियर पुलिस खुद को बचाने के लिए बड़ा कारनामा कर बैठी, ग्वालियर के पड़ाव थाने में खुद को बचाने के लिए छात्रा की मौत के पांच घंटे बाद सूचना थाने पर प्राप्त होना बताई गई। छात्रा ने शुक्रवार शाम करीब छह बजे फांसी लगा ली थी और जब ग्वालियर पुलिस को पता लगा तो आनन-फानन में रात 11 बजे थाने पर सूचना और 11.55 बजे एफआईआर दर्ज कर ली गई। इसमें ग्वालियर पुलिस ने पांच घंटे पहले मर चुकी पीड़िता को थाने पर अपने जीजा के साथ उपस्थित बताया।

नईदुनिया ने जब पड़ताल की तो पुलिस की कारगुजारी सामने आई। पड़ाव थाना पुलिस ने एफआइआर में विलंब का कारण भी फरियादिया का थाने पर उपस्थित होना बताया। अब सबसे बड़ा सवाल है जो पीड़िता पांच घंटे पहले ही मर चुकी है। उसकी थाने पर मौजूदगी कैसे बता दी गई? वहीं आरोपी योगेश रावत निवासी पचौखरा, गोराघाट को अशोक नगर से गिरफ्तार कर लिया गया है।

यह एफआइआर ग्वालियर पुलिस के गले की फांस बन गई है, क्योंकि दुष्कर्म की धाराएं लगी हैं। पीड़िता का मेडिकल, डीएनए जांच के लिए सैंपल, साक्ष्य एकत्रिकरण, नक्शा-मौका सबकुछ बनाया जाता है। एफआईआर में आरोपित को गिरफ्तार कर लिया जाता है तो चालान कैसे लगेगा। धारा-164 के कथन किसके होंगे। तमाम सवाल हैं, जिनके जवाब पहले पीड़िता को भटकाने फिर उसकी मौत के बाद एफआईआर करने वाले पुलिस अधिकारियों के पास नहीं हैं। कानून के जानकार कहते हैं- अगर एफआईआर पहले दर्ज कर ली जाती तो यह कानूनी अड़चनें न होतीं।

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अपराध के बाद एफआईआर टालना….ग्वालियर में अजीब कानून

किसी भी अपराध के बाद एफआईआर सबसे पहले दर्ज होती है, लेकिन ग्वालियर में पिछली कुछ घटनाओं में सामने आया। पुलिस अधिकारी थाना प्रभारियों से कहते हैं- पहले आरोपित को चिह्नित करो, फिर पकड़ो और इसके बाद एफआईआर दर्ज करो। थाना प्रभारी दबी जुबान में यह स्वीकार कर रहे हैं। इसमें भी ऐसा ही हुआ। इस घटना से पहले थाटीपुर में हुई मारपीट फिर मौत के मामले में भी मृतक के स्वजन ने पुलिस पर एफआईआर न लिखने के आरोप लगाए थे। मामले में पड़ाव थाना प्रभारी शैलेंद्र भार्गव को फोर्स लीव पर भेजा गया है। मामले की जांच एएसपी अनु बेनीवाल को दी गई है। सात दिन में जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है।

छात्रा एक्टोपिक प्रेग्नेंसी झेल चुकी थी, सर्जरी करानी पड़ी, फिर शादी से मुकरा

  • छात्रा के साथ सबसे पहले 13 मार्च को होटल राम्या पैलेस के कमरा नंबर-107 में बेहोशी की हालत में योगेश रावत ने दुष्कर्म किया। जब होश आने पर रोने लगी तो बोला- शादी कर लेगा।
  • 15 मार्च को फिर इसी होटल में ले जाकर दुष्कर्म किया।
  • 18 अप्रैल को छात्रा के पेट में दर्द हुआ। केआरएच में उसने डॉक्टर अचला सहाय शर्मा से चेकअप कराया। वह गर्भवती निकली। डाक्टर ने उसे एक्टोपिक प्रेग्नेंसी बताई, जो जानलेवा थी। इसमें सर्जरी जरूरी थी। उसका यूटेरस तक निकल गया। 22 अप्रैल को अस्पताल से छुट्टी हुई। फिर योगेश गुड़गांव होने की बात कहकर उसे दूर होने लगा। फिर शादी से इन्कार कर दिया। तब छात्रा छह मई को सबसे पहले एफआइआर के लिए पड़ाव थाने पहुंची।
  • 14 मई तक एफआईआर के लिए पड़ाव थाना और एसएसपी कार्यालय चक्कर काटे।

क्या है एक्टोपिक प्रेग्नेंसी

यह वह स्थिति है- जब निषेचित अंडा गर्भाशय के बजाय फैलोपियन ट्यूब में चिपक कर विकसित होने लगता है। यह स्थिति जानलेवा होती है।

विस्तृत जांच की जा रही है…

दुष्कर्म के केस में आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले में एफआईआर में लापरवाही क्यों बरती गई, क्यों विलंब हुआ विस्तृत जांच की जा रही है। थाना प्रभारी को फोर्स लीव पर भेजा है। -अनु बेनीवाल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक।



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