ग्वालियर में उपभोक्ता आयोग ने खराब वाशिंग मशीन मामले में कंपनी को राहत देने के आदेश दिए। वहीं हाईकोर्ट ने हैवियस कार्पस मामलों में पुलिस अधिकारियों की …और पढ़ें

Publish Date: Sun, 17 May 2026 10:44:47 AM (IST)Updated Date: Sun, 17 May 2026 10:44:47 AM (IST)

ग्वालियर कोर्ट ने ग्राहक के पक्ष में सुनाया फैसला, खराब वॉशिंग मशीन को सुधारो या फिर लौटाओ 19 हजार रुपये
ग्वालियर में उपभोक्ता अधिकार की जीत। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. खराब वाशिंग मशीन पर उपभोक्ता आयोग ने सख्त फैसला सुनाया।
  2. मशीन ठीक नहीं होने पर 19 हजार लौटाने के निर्देश।
  3. मानसिक प्रताड़ना के लिए पांच हजार रुपये मुआवजा देने आदेश।

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। ग्वालियर में उपभोक्ता अधिकार और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े दो अहम मामलों में सख्त रुख सामने आया है। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने खराब वाशिंग मशीन बेचने के मामले में सैमसंग इंडिया इलेक्ट्रोनिक्स को उपभोक्ता को राहत देने के निर्देश दिए हैं।

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने हैवियस कार्पस याचिकाओं में पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी और बढ़ा दी है। दोनों मामलों में अदालतों ने साफ संकेत दिए हैं कि लापरवाही और जवाबदेही से बचने की कोशिश अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

खराब वाशिंग मशीन मामले में उपभोक्ता को राहत

  • जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद शर्मा ने ग्वालियर निवासी रिसाल सिंह की शिकायत पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। शिकायतकर्ता ने बताया कि उन्होंने एक अक्टूबर 2022 को 22 हजार रुपये में सैमसंग कंपनी की वाशिंग मशीन खरीदी थी, लेकिन शुरुआत से ही मशीन में तकनीकी खराबियां आने लगी थीं। मशीन कपड़े फाड़ रही थी और सही तरीके से धुलाई भी नहीं कर रही थी।
  • उपभोक्ता का आरोप था कि खरीद के समय मशीन की स्पीड 700 से 800 आरपीएम बताई गई थी, जबकि बाद में कंपनी के इंजीनियरों ने इसकी वास्तविक स्पीड 200 से 250 आरपीएम बताई। कई बार शिकायत दर्ज कराने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ। 19 सितंबर 2024 को शिकायत के बाद भी कंपनी ने मशीन ठीक नहीं की।
  • आयोग ने माना कि रिकॉर्ड से यह स्पष्ट है कि मशीन में लगातार खराबी बनी रही और कंपनी ने उपभोक्ता की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया। आयोग ने आदेश दिया कि कंपनी 45 दिन के भीतर मशीन को पूरी तरह ठीक कर लौटाए। यदि मशीन सुधार योग्य नहीं है तो 22 हजार रुपये की कीमत में से तीन हजार रुपये उपयोग अवधि के आधार पर काटकर शेष 19 हजार रुपये उपभोक्ता को लौटाने होंगे।
  • इसके अलावा मानसिक प्रताड़ना के लिए पांच हजार रुपये और वाद व्यय के रूप में दो हजार रुपये देने के भी निर्देश दिए गए हैं। तय समय में भुगतान नहीं होने पर छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
  • विक्रेता और कंपनी पर सेवा में कमी का आरोप

    मामले की सुनवाई के दौरान विक्रेता पक्ष ने स्वयं को केवल विक्रेता बताते हुए जिम्मेदारी से अलग करने का प्रयास किया, जबकि निर्माता कंपनी आयोग में उपस्थित ही नहीं हुई। आयोग ने टिप्पणी की कि कोई भी उपभोक्ता बिना कारण शिकायत लेकर आयोग नहीं पहुंचता। लगातार शिकायतों के बावजूद समाधान न देना सेवा में कमी की श्रेणी में आता है।

    हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश

    • दूसरे महत्वपूर्ण घटनाक्रम में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने हैवियस कार्पस याचिकाओं को लेकर पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी बढ़ा दी है। हाईकोर्ट के निर्देश पर अतिरिक्त महाधिवक्ता विवेक खेडकर ने ग्वालियर संभाग सहित कई जिलों के पुलिस अधीक्षकों को पत्र जारी किया है।
    • निर्देशों में कहा गया है कि हैवियस कार्पस मामलों में जांच और केस डायरी प्रस्तुत करने में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। यदि संबंधित व्यक्ति न्यायालय में प्रस्तुत होती है तो जांच अधिकारी को मूल केस डायरी बंद लिफाफे में लेकर स्वयं कोर्ट में उपस्थित होना होगा और न्यायालय के सवालों के जवाब देने होंगे।
  • यदि संबंधित व्यक्ति अदालत में उपस्थित नहीं होती है, तब भी अनुसंधानकर्ता अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर व्यवस्थित केस डायरी पेश करनी होगी। अधिकारियों को केस डायरी की फोटोकापी अपने पास रखने और आवश्यकता पड़ने पर शासकीय अधिवक्ता को उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए गए हैं।
  • लापरवाही पर थाना प्रभारी होंगे जिम्मेदार

    • पत्र में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि केस डायरी में किसी प्रकार की कमी या लापरवाही पाए जाने पर संबंधित थाना प्रभारी और जांच अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार माने जाएंगे। यह निर्देश ग्वालियर, शिवपुरी, भिंड, मुरैना, दतिया, श्योपुर, विदिशा, अशोकनगर और गुना जिलों के पुलिस अधीक्षकों को भेजे गए हैं।
    • साथ ही सभी नोडल अधिकारियों को प्रतिदिन आने वाली काज लिस्ट में हैवियस कार्पस याचिकाओं की निगरानी करने और संबंधित थानों को तत्काल सूचना देने के निर्देश दिए गए हैं।



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