ग्वालियर निवासी डा. सौम्यता जैन ने आयोग में परिवाद दायर कर बताया कि उनके वाहन के फास्टैग खाते से वर्ष 2021 और 2022 की कथित टोल यात्राओं के नाम पर 30 अ …और पढ़ें

Publish Date: Thu, 14 May 2026 10:13:07 AM (IST)Updated Date: Thu, 14 May 2026 10:14:08 AM (IST)

घर में खड़ी कार का 3 साल बाद काटा फास्टैग टोल; उपभोक्ता फोरम ने पीएनबी पर लगाया भारी जुर्माना
प्रतीकात्मक चित्र।

HighLights

  1. बिना यात्रा बैंक ने खाते से उड़ाए ₹आठ हजार 557 रुपये
  2. उपभोक्ता फोरम ने 45 दिन में रिफंड का दिया आदेश
  3. समयसीमा में भुगतान नहीं होने पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। फास्टैग व्यवस्था में लापरवाही का एक मामला सामने आया है, जिसमें कार (वाहन) से यात्रा किए बिना ही उपभोक्ता के खाते से हजारों रुपये काट लिए गए। ग्वालियर निवासी डा. सौम्यता जैन ने आयोग में परिवाद दायर कर बताया कि उनके वाहन के फास्टैग खाते से वर्ष 2021 और 2022 की कथित टोल यात्राओं के नाम पर 30 अप्रैल 2024 को अचानक आठ हजार 557 रुपये काट लिए गए।

राशि कटने पर बैंक से किया संपर्क

शिकायतकर्ता का कहना था कि जिन तारीखों का टोल रिकार्ड बैंक की ओर से दिखाया गया, उन दिनों वाहन से कोई यात्रा नहीं की गई थी और न ही फास्टैग का उपयोग हुआ था। डा. जैन के अनुसार, राशि कटने की जानकारी मिलने पर उन्होंने बैंक से संपर्क किया।

इस पर बैंक ने तकनीकी त्रुटि होने की बात कही और बताया कि पहले राशि नहीं कट सकी थी, इसलिए बाद में खाते से काटी गई। हालांकि आयोग में बैंक यह स्पष्ट नहीं कर सका कि तकनीकी गड़बड़ी आखिर कब और कैसे हुई। बैंक की ओर से इस संबंध में कोई दस्तावेजी साक्ष्य भी पेश नहीं किए गए। मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने माना कि फास्टैग प्रणाली में टोल राशि तत्काल काटी जाती है और उसके बाद ही वाहन को टोल प्लाजा से गुजरने की अनुमति मिलती है।

ऐसे में दो से तीन साल बाद उपभोक्ता की अनुमति के बिना खाते से राशि काटना पूरी तरह अनुचित है और यह सेवा में कमी की श्रेणी में आता है। आयोग ने बैंक को आदेश दिया है कि वह 45 दिन के भीतर शिकायतकर्ता के खाते में आठ हजार 557 रुपये वापस जमा करे। इसके अलावा मानसिक प्रताड़ना के लिए 10 हजार रुपये और वाद व्यय के रूप में दो हजार रुपये भी अदा करने होंगे। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि तय समयसीमा में भुगतान नहीं होने पर बैंक को छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।



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