जबलपुर के बरगी डैम में 30 अप्रैल को हुए दर्दनाक क्रूज हादसे में 13 लोगों की मौत के बाद अब कई चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। शुरुआती जांच और दस्तावेजों से संकेत मिल रहे हैं कि यह हादसा केवल प्राकृतिक परिस्थितियों का नतीजा नहीं था, बल्कि लंबे समय से चली आ रही तकनीकी लापरवाही और चेतावनियों को नजरअंदाज करने का परिणाम हो सकता है। अब खुलासा हुआ है कि क्रूज का इंजन में खराबी थी। इसे अमर उजाला ने 4 मई को ‘बरगी क्रूज हादसा: क्रूज पायलट के खुलासे से उठे बड़े सवाल, 38 लाख के री-फिट के बाद भी कैसे गई 13 जान?” शीर्षक से प्रमुखता से उठाया था। जानकारी के मुताबिक हादसे से करीब दो महीने पहले, 1 मार्च 2026 को बरगी स्थित मैकल रिसोर्ट के मैनेजर ने मध्य प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (MPSTDC) के क्षेत्रीय प्रबंधक को पत्र लिखकर क्रूज की खराब स्थिति को लेकर आगाह किया था। पत्र में उल्लेख किया गया था कि 14 जनवरी 2025 को संचालन के दौरान क्रूज के दोनों इंजन अचानक बंद हो गए थे, जिसके कारण तेज हवाओं और लहरों के बीच क्रूज पानी में फंस गया था। बाद में स्पीड बोट की मदद से उसे किनारे लाया गया।

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इंजन में लगातार आ रही थी खराबी

पत्र में यह भी बताया गया था कि क्रूज के एक इंजन को स्टार्ट करने में लगातार दिक्कत आ रही थी। कई बार क्रूज सेवाएं बंद करनी पड़ती थीं, जिससे पर्यटकों में नाराजगी बढ़ रही थी। मैनेजर ने स्पष्ट रूप से लिखा था कि वर्तमान में संचालित “मैकल सुता” क्रूज के इंजन का तत्काल सुधार या बदलाव जरूरी है, अन्यथा कभी भी संचालन रोकना पड़ सकता है। 

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विशेषज्ञों ने भी दी थी इंजन बदलने की सलाह

पत्र में हैदराबाद बोट बिल्डर्स के विशेषज्ञों की राय का भी हवाला दिया गया था। विशेषज्ञों ने बताया था कि क्रूज में लगे इंजन पुराने और चलन से बाहर हो चुके हैं तथा उनके स्पेयर पार्ट्स बाजार में उपलब्ध नहीं हैं। सुरक्षा की दृष्टि से इंजन बदलना अनिवार्य बताया गया था। बावजूद इसके करीब 20 साल पुराने इस क्रूज को पर्यटकों के लिए चलाया जाता रहा। 

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री-फिट पर खर्च हुए 38 लाख पर सवाल

हादसे के बाद क्रूज पायलट महेश पटेल के बयान ने मामले को और गंभीर बना दिया है। पायलट ने दावा किया कि हादसे के समय क्रूज का एक इंजन पूरी क्षमता से काम नहीं कर रहा था। इसके बाद अब तीन साल पहले हुए करीब 38 लाख रुपये के री-फिट और मरम्मत कार्य पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। दरअसल पर्यटन निगम के एडवाइजर कमांडर राजेंद्र निगम ने बताया था कि 2024 में क्रूज पर 38 लाख खर्च कर 10 साल उम्र बढ़ा दी गई थी। यदि क्रूज को हाल ही में सुरक्षित घोषित किया गया था, तो फिर तकनीकी खराबी कैसे बनी रही?

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जांच से पहले क्रूज को तोड़ डाला 

क्रूज पायलट ने यह भी मीडिया से बातचीत में बताया था कि क्रूज के इंजन में खराबी थी। इसको लेकर उन्होंने ऊपर तक जानकारी दी थी। वहीं, संचालन से पहले मौसम विभाग के यलो अलर्ट की कोई जानकारी उन्हें नहीं दी गई थी। वापसी के दौरान अचानक तेज हवाएं और ऊंची लहरें उठने लगीं, जिससे क्रूज में पानी भरने लगा। पायलट के मुताबिक कई यात्रियों ने फोटो और वीडियो बनाने के दौरान लाइफ जैकेट भी नहीं पहन रखी थी।  पर्यटन निगम के अधिकारियों की इस मामले में लगातार लापरवाही सामने आ रही है। उनके नेतृत्व में ही क्रूज को निकालने के बाद उसे दो दिन तक जेसीबी से पूरा तोड़ डाला गया था। ऐसे में जांच शुरू होने से पहले क्रूज को तोड़ने पर अधिकारियों की भूमिका की संदिग्ध हैं।



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