नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। बिरला नगर स्थित श्याम मंदिर के सामने सब स्टेशन में हुए एक गंभीर हादसे ने बिजली विभाग की कार्यशैली और सुरक्षा इंतजामों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। मंगलवार दोपहर सप्लाई शुरू करने के दौरान पोटेंशियल ट्रांसफार्मर (पीटी) अचानक धमाके के साथ फट गया, जिससे उसकी बुशिंग नीचे खड़े 61 वर्षीय सहायक लाइनमैन हरिओम शर्मा के सिर पर गिर गई। हादसे में उनके सिर की हड्डी टूट गई और वे पिछले तीन दिनों से अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं।
निजी अस्पताल में इलाज
हरिओम शर्मा का इलाज सेवा नगर रोड स्थित एक निजी अस्पताल में चल रहा है। डॉक्टरों के अनुसार उनकी हालत में मामूली सुधार जरूर हुआ है, लेकिन वे अभी भी खतरे से बाहर नहीं हैं।
सुरक्षात्मक हेलमेट नहीं पहना था
घटना के समय मौके पर मौजूद किसी भी कर्मचारी ने हार्ड हैट (सुरक्षात्मक हेलमेट) नहीं पहन रखा था। ऐसे उच्च जोखिम वाले कार्य में सुरक्षा उपकरणों की अनिवार्यता के बावजूद बिजली अफसरों की लापरवाही ने हादसे को और गंभीर बना दिया।
स्वजन का आरोप- जबरन ड्यूटी कराई गई
घायल लाइनमैन के बेटे शुभम शर्मा ने बिजली कंपनी के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उनके पिता का रिटायरमेंट सिर्फ 11 महीने बाद है, इसके बावजूद उन्हें जबरन लाइन पर काम के लिए ले जाया गया। उन्होंने यह भी बताया कि हादसे की सूचना परिवार को करीब दो घंटे बाद दी गई। परिवार ने पूरे मामले में जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
काम नहीं कर रहे थे, सिर्फ मौजूद थे
वहीं बिजली कंपनी के डीजीएम (उत्तर संभाग) उमेश शर्मा ने सफाई देते हुए कहा कि हरिओम शर्मा से मौके पर कोई काम नहीं लिया जा रहा था, वे केवल पास में खड़े थे, तभी यह दुर्घटना हुई। अधिकारियों के अनुसार घायल को तुरंत अस्पताल पहुंचाकर इलाज शुरू कराया गया।
मंत्री ने अस्पताल पहुंचकर जाना हाल, मदद का दिया आश्वासन
घटना के बाद ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने अस्पताल पहुंचकर हरिओम शर्मा की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने स्वजन को हर संभव इलाज उपलब्ध कराने का भरोसा दिया।
बड़े सवाल खड़े
इस हादसे ने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या वरिष्ठ कर्मचारियों से जोखिम भरे कार्य लिए जा रहे हैं, क्या सुरक्षा मानकों का पालन सिर्फ कागजों तक सीमित है और सबसे बड़ा सवाल क्या इस लापरवाही के लिए जिम्मेदारी तय होगी। फिलहाल हरिओम शर्मा की हालत नाजुक बनी हुई है और पूरा मामला बिजली विभाग की जवाबदेही पर केंद्रित हो गया है।
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