भोपाल क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान में चल रहे सांस्कृतिक कार्यक्रम के दूसरे और अंतिम दिन बुधवार को विविध रंगारंग प्रस्तुतियों ने मन मोहा। कार्यक्रम में एकल नृत्य, युगल नृत्य, सामूहिक नृत्य और मूक अभिनय जैसी प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में निर्धारित विषयों के अंतर्गत सामूहिक नृत्यों के लिए ‘भारत के सदाबहार नगमे’ और मूक अभिनय के लिए ‘समावेशी शिक्षा’ विषय रखा गया था। प्रतिभागी विद्यार्थियों ने अपनी ऊर्जा, रचनात्मकता और प्रस्तुति कौशल से पूरे सभागार को उत्साह से भर दिया।
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शास्त्रीय नृत्य शैलियों की मनमोहक प्रस्तुतियां
एकल नृत्य प्रतियोगिता में ओडिशी, कुचिपुड़ी, मोहिनीअट्टम, कथक, लावणी और भरतनाट्यम जैसी शास्त्रीय नृत्य शैलियों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने भारतीय सांस्कृतिक विरासत की झलक पेश की। वहीं, युगल नृत्य में सदाबहार गीतों पर आधारित प्रस्तुतियों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। कई दर्शक तालियों की गूंज के साथ कलाकारों का उत्साहवर्धन करते नजर आए। मूक अभिनय के माध्यम से समावेशी शिक्षा का प्रभावी संदेश प्रस्तुत किया गया, जिसने सामाजिक समरसता और शिक्षा की समानता पर गहरा प्रभाव छोड़ा। वहीं सामूहिक नृत्यों ने कार्यक्रम को अपने चरम उत्कर्ष पर पहुंचा दिया और पूरा वातावरण सांस्कृतिक रंग में रंग गया।
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वरिष्ठों ने विद्यार्थियों को की रचनात्मकता को सराहा
कार्यक्रम के समापन अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, भोपाल के कुलसचिव डॉ. समर बहादुर सिंह उपस्थित रहे। उन्होंने विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए उन्हें उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर संस्थान के प्राचार्य डॉ. शिव कुमार गुप्ता, अधिष्ठाता डॉ. जयदीप मंडल सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ शिक्षक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समन्वयन डॉ. सौरभ कुमार द्वारा किया गया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. मधुसूदन द्वारा प्रस्तुत किया गया। पूरा आयोजन सांस्कृतिक प्रतिभा और रचनात्मकता का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आया।
