नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। नगर निगम के इंजीनियरों ने केदारपुर प्लांट से गत 16 मई को कार्यशाला के लिए निकलकर रास्ते में गायब हुआ टैंकर मुर्गी फार्म पानी की टंकी पर खड़ा दिखाया है। नईदुनिया द्वारा इस मामले को उजागर करने के बाद अब निगम के इंजीनियर बहानेबाजी में जुट गए हैं।
निगमायुक्त संघ प्रिय द्वारा लगाई गई फटकार के बाद इंजीनियरों ने बहाने बनाए हैं कि ये सीवर का टैंकर पानी भरने के लिए हाइड्रेंट पर भेजा गया था। इसमें गौर करने वाली बात यह है कि जिस केदारपुर प्लांट प्रभारी संदीप मौर्य द्वारा टैंकर भेजना बताया गया है, उन्हें गत गुरुवार तक खुद ही मामले की जानकारी नहीं थी।
लीपापोती में जुटे इंजीनियर
इसके अलावा यदि प्लांट प्रभारी ने टैंकर भेजा भी था, तो वह पीएचई के इंजीनियर हैं और उन्हें भली-भांति पता होना चाहिए कि कौन-सा टैंकर सीवर का है और कौन-सा पानी का। कुल मिलाकर इस पूरे मामले में अब नगर निगम के इंजीनियर लीपापोती में जुट गए हैं। हालांकि निगमायुक्त ने मामले की विस्तृत जांच कराने की बात कही है, क्योंकि कई सवाल अब भी इस मामले में उठ रहे हैं जिनके जवाब इंजीनियरों के पास नहीं है। केदारपुर प्लांट के रजिस्टर में इस टैंकर को किसी अन्य इंजीनियर के आदेश से ले जाना बताया गया है, जबकि निगमायुक्त को दी गई रिपोर्ट में प्लांट प्रभारी के नाम का जिक्र किया जा रहा है।
बता दें कि 16 मई को केदारपुर प्लांट पर खड़े एक टैंकर को कार्यशाला में मरम्मत के लिए भेजने का हवाला देकर निकाला गया। इसमें ड्राइवर कृष्णपाल सिंह के नाम का हवाला है, जबकि हस्ताक्षर विवेक के नाम से किए गए हैं जो केदारपुर पर अधिकृत रूप से पदस्थ भी नहीं है।
ये टैंकर रास्ते से गायब हो गया और 41 दिन तक इसकी सुध नहीं ली गई। नईदुनिया ने शुक्रवार के अंक में ‘41 दिन में 18 किमी का सफर पूरा नहीं कर पाया टैंकर, रास्ते से ही हुआ गायब’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित कर मामला उजागर किया, तो टैंकर को मुर्गी फार्म टंकी पर खड़ा दिखाया गया है। अब इसे वापस केदारपुर ले जाया जाएगा।
इन सवालों में उलझ रहे इंजीनियर
केदारपुर प्रभारी खुद पीएचई के इंजीनियर हैं। टैंकर भेजने से पहले उन्होंने चेक नहीं किया कि ये सीवर का है या पानी का, जबकि इसमें उनकी विशेषज्ञता है।
जब टैंकर कार्यशाला के लिए निकला था, तो उसे हाइड्रेंट पर क्यों ले जाया गया?
केदारपुर के रजिस्टर में प्रभारी के आने-जाने तक की एंट्री होती है, लेकिन प्रभारी के आदेश से ये टैंकर कार्यशाला के लिए गया ये उन्हें खुद नहीं पता था। नईदुनिया को दिए बयान में भी उन्होंने टैंकर जाने की जानकारी न होने की बात कही।
यदि प्रभारी ने आदेश दिया था तो रजिस्टर में उनके नाम का उल्लेख क्यों नहीं किया गया। उनके स्थान पर नोडल अधिकारी शैलेंद्र सक्सेना का नाम लिखा है।
यदि टैंकर को उपयोग के लिए हाइड्रेंट भेजा गया था, तो रजिस्टर में कार्यशाला क्यों लिखा गया?
