लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक-2026 पारित न होने पर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। मध्य प्रदेश भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने इसे महिलाओं के अधिकारों से जुड़ा अहम मुद्दा बताते हुए विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। खंडेलवाल ने कहा कि यह विधेयक देश की महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था, लेकिन इसके पारित न होने से करोड़ों महिलाओं की उम्मीदों को झटका लगा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके और समाजवादी पार्टी समेत विपक्षी दलों ने इस बिल का विरोध कर अपनी महिला-विरोधी मानसिकता को उजागर किया है।


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भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि यह विधेयक महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण और निर्णय प्रक्रिया में उनकी भागीदारी बढ़ाने के लिए जरूरी था। पार्टी नेताओं ने इसे “आधी आबादी” के अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताते हुए कहा कि विपक्ष ने राजनीतिक कारणों से इसका समर्थन नहीं किया। सत्तारूढ़ पक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार को महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध बताते हुए कहा कि सरकार लगातार इस दिशा में काम कर रही है। हालांकि, विपक्ष के विरोध के चलते इस महत्वपूर्ण विधेयक को पारित नहीं किया जा सका।

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वहीं, विपक्षी दलों की ओर से इस मुद्दे पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ दलों का कहना है कि विधेयक के प्रावधानों और प्रक्रिया को लेकर उनकी आपत्तियां थीं, जिसके चलते उन्होंने समर्थन नहीं दिया। इस पूरे घटनाक्रम के बाद महिला आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। आने वाले समय में इस पर और तीखी राजनीतिक प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है। 

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