नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। मध्य प्रदेश के किसानों की फसलों की उत्पादकता बढ़ाने और मिट्टी के गिरते स्वास्थ्य को बचाने के लिए ग्वालियर स्थित राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय अब फसलों के लिए विशेष माइक्रो न्यूट्रिएंट फार्मूला (सूक्ष्म पोषक तत्व मिश्रण) विकसित करेगा। इस परियोजना के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आइसीएआर) ने फंड जारी कर दिया है, जिससे विश्वविद्यालय के विज्ञानी इस प्रोजेक्ट पर काम करेंगे।

विश्वविद्यालय के विज्ञानियों द्वारा किए गए प्रारंभिक मृदा मूल्यांकन में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। अब तक माना जाता था कि मिट्टी में केवल नाइट्रोजन, फास्फोरस या पोटाश की कमी है, लेकिन अध्ययन में पाया गया कि प्रदेश की मिट्टी में अब द्वितीयक और सूक्ष्म पोषक तत्वों का स्तर भी चिंताजनक रूप से गिर रहा है। मिट्टी में मैग्नीशियम और कैल्शियम की कमी पाई गई। बोरान, जस्ता (जिंक) और तांबा (कापर) का स्तर भी सामान्य से कम मिला। इसके बाद कृषि विज्ञानियों ने सूक्ष्म पोषक तत्व मिश्रण तैयार करने का प्रोजेक्ट तैयार किया था।

उर्वरकों का अंधाधुंध प्रयोग बना समस्या

विज्ञानी अध्ययन के अनुसार, समस्या की मुख्य जड़ किसानों द्वारा जानकारी के अभाव में उर्वरकों का अंधाधुंध इस्तेमाल करना है। किसान बिना मिट्टी की जांच कराए खाद डाल रहे हैं, जिससे मिट्टी की समस्या सुलझने के बजाय और अधिक गंभीर होती जा रही है। नया प्रोजेक्ट इसी असंतुलन को दूर करने के लिए मिट्टी अनुरूप फार्मूला तैयार करेगा।

  • नए फार्मूले विकसित होने से कृषि क्षेत्र में यह सुधार देखने को मिलेंगे
  • मिट्टी की वास्तविक आवश्यकता के अनुसार पोषक तत्व दिए जा सकेंगे।
  • व्यर्थ में डाले जाने वाले महंगे उर्वरकों पर किसानों का खर्च कम होगा।
  • सूक्ष्म तत्वों की पूर्ति होने से फसलों की गुणवत्ता और वजन बढ़ेगा।
  • लंबे समय तक भूमि की उर्वरा शक्ति बनी रहेगी।

मिट्टी में कुल 16 पोषक तत्व होते है

कार्बन, हाइड्रोजन, आक्सीजन, नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, कैल्सियम, मैग्नीशियम, सल्फर, जिंक, आयरन, कापर, बोरान, मैंगनीज, मोलिबडनम, क्लोरीन है, जो सभी प्रकार के पौधे और फसलों के जीवनचक्र के लिए आवश्यक है। इसमें नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश की अधिक मात्रा की जरूरत होती है।

मिट्टी का गिरता स्वास्थ्य चिंता का विषय

डॉ अरविंद कुमार शुक्ला, कुलगुरु, राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर ने कहा कि मिट्टी का गिरता स्वास्थ्य और पोषक तत्वों का असंतुलन भविष्य की कृषि के लिए एक गंभीर चुनौती है। अब केवल परंपरागत खाद से काम नहीं चलेगा। मिट्टी को सूक्ष्म तत्वों की भी आवश्यकता है। सूक्ष्म पोषक तत्व फार्मूले न केवल किसानों की लागत कम करेंगे, बल्कि भूमि को फिर से उर्वर और समृद्ध बनाएंगे।



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