मध्यप्रदेश विधानसभा में सोमवार को नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर विशेष सत्र आयोजित किया जाएगा। इस विशेष सत्र में राज्य सरकार महिला आरक्षण के समर्थन में शासकीय संकल्प पेश करेगी। इसे लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है और सदन में हंगामे के आसार हैं। सदन की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू होगी। कार्यसूची के अनुसार शुरुआत में पूर्व विधायक, पूर्व केंद्रीय मंत्रियों और अन्य दिवंगत हस्तियों को श्रद्धांजलि दी जाएगी। इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सदन में शासकीय संकल्प प्रस्तुत करेंगे।संकल्प में कहा गया है कि महिलाओं के सर्वांगीण विकास और सशक्तिकरण के लिए संसद और सभी विधानसभाओं में महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए। यह संकल्प ऐसे समय लाया जा रहा है, जब केंद्र सरकार द्वारा पेश किया गया महिला आरक्षण से जुड़ा 131वां संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं हो सका। इसके बाद देशभर में इस मुद्दे पर सियासत तेज हो गई है।
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सदन में टकराव के आसार
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विधानसभा में पारित होने वाला यह संकल्प कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं होगा, क्योंकि संविधान संशोधन का अधिकार संसद के पास है। हालांकि राजनीतिक रूप से इसे काफी अहम माना जा रहा है। भाजपा इसे महिला सशक्तिकरण के समर्थन के रूप में पेश कर रही है और लगातार कांग्रेस पर महिला आरक्षण का विरोध करने का आरोप लगा रही है। वहीं कांग्रेस ने भाजपा पर इस मुद्दे का राजनीतिक फायदा उठाने का आरोप लगाया है। कांग्रेस का कहना है कि यदि सरकार गंभीर है तो लोकसभा की 543 सीटों और मध्यप्रदेश विधानसभा की 230 सीटों पर महिला आरक्षण तुरंत लागू किया जाए। इस मुद्दे पर सदन में दोनों पक्षों के बीच जमकर टकराव होना तय है।
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सत्र से पहले दोनों दलों की बैठक
सत्र शुरू होने से करीब दो घंटे पहले भाजपा और कांग्रेस दोनों अपने-अपने विधायक दल की बैठक करेंगे। भाजपा विधायक दल की बैठक मुख्यमंत्री निवास पर होगी, जहां सत्तापक्ष अपनी रणनीति तय करेगा। वहीं कांग्रेस विधायक दल की बैठक नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के निवास पर होगी, जिसमें सरकार को घेरने की रणनीति बनाई जाएगी। वहीं, कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि सरकार महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर गंभीर नहीं है और केवल राजनीतिक फायदे लेने के लिए विशेष सत्र बुलाया गया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सदन में इस मुद्दे को मजबूती से उठाएगी। महिला आरक्षण जैसे बड़े मुद्दे पर होने वाला यह विशेष सत्र राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है और सदन में तीखी बहस की संभावना है।