यह डिजिटल बाजीगरी कंपनी के कागजी आंकड़ों और रैंकिंग को दुरुस्त रखने के लिए की जा रही है, जबकि जमीन पर उपभोक्ता पूरी रात अंधेरे और पसीने में काटने को म…और पढ़ें

HighLights
- प्रबंध संचालक के 24 घंटे ऑन-कॉल रहने के आदेश हवा
- रात में फोन उठाना शान के खिलाफ समझ रहे मैदानी अफसर
- गर्मी-उमस के बीच पूरी रात अंधेरे में कट रही जनता की रात
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। गर्मी और उमस के बीच बिजली कंपनी के निर्बाध बिजली आपूर्ति के तमाम दावे धरातल पर हवा साबित हो रहे हैं। एक तरफ जहां रखरखाव के चलते बिजली गुल से आमजन का जीना मुहाल है, वहीं दूसरी तरफ बिजली कंपनी के शिकायत पोर्टल पर उपभोक्ताओं के साथ अजीब खेल खेला जा रहा है।
रात के समय बिजली गुल होने पर जब उपभोक्ता टोल-फ्री नंबर 1912 पर शिकायत दर्ज कराते हैं, तो बिना बिजली आए ही उनकी शिकायत को सिस्टम में रिजाल्व्ड (समाधान हो गया) दिखाकर बंद कर दिया जाता है। यह डिजिटल बाजीगरी कंपनी के कागजी आंकड़ों और रैंकिंग को दुरुस्त रखने के लिए की जा रही है, जबकि जमीन पर उपभोक्ता पूरी रात अंधेरे और पसीने में काटने को मजबूर हैं।
काम शून्य, रिपोर्ट ओके
शिकायत दर्ज कराते ही कुछ देर बाद मोबाइल पर मैसेज आता है कि आपकी समस्या का समाधान कर दिया गया है, जबकि पंखे और बत्तियां ठप पड़ी रहती हैं। यह उपभोक्ताओं के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है। रात को गुल हुई बिजली अब सीधे सुबह ही नसीब हो पा रही है।
एमडी के निर्देश ठेंगे पर, अफसर बेपरवाह
बिजली कंपनी के प्रबंध संचालक ऋषि गर्ग ने उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहना है कि फ्यूज आफ काल यानी विद्युत अवरोध को समय पर अटैंड किया जाए और सभी मैदानी अधिकारी व कर्मचारी अपना मोबाइल फोन 24 घंटे चालू रखें, लेकिन धरातल पर स्थिति इसके बिल्कुल उलट है। स्थानीय जिम्मेदार अफसर रात के समय उपभोक्ताओं का फोन उठाना अपनी शान के खिलाफ समझते हैं। नतीजा यह है कि 1912 हेल्पलाइन महज एक औपचारिकता बनकर रह गई है और मैदानी अमला अपनी मनमर्जी चला रहा है।
केस एक: शिकायत बंद, अंधेरा कायम
- उपभोक्ता: मनीषा श्रीवास्तव, समय: रात 12:03 बजे
- क्या हुआ: रात करीब 12 बजे घर की बिजली गुल हो गई। मनीषा ने तत्काल 1912 पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत संख्या मिलने के ठीक 20 मिनट बाद उनके मोबाइल पर मैसेज आया आपकी शिकायत का निवारण कर दिया गया है, जबकि हकीकत यह थी कि घर में अंधेरा था। स्थानीय अधिकारियों को फोन लगाए तो किसी ने भी फोन नहीं उठाए। जब दोबारा 1912 पर प्रयास किया तो फिर से शिकायत दर्ज की गई। सुबह चार बजे मैदानी अमला पहुंचा तब जाकर फाल्ट सुधरा।
केस दो: बुजुर्ग तड़पते रहे, अफसर का फोन बंद
- उपभोक्ता: सुनीता शर्मा, समय: रात 1:15 बजे
- क्या हुआ: सुनीता शर्मा के घर में उनके 72 वर्षीय ससुर अस्थमा के मरीज हैं। रात सवा एक बजे बिजली कटी तो उनको परेशानी होने लगी। घबराकर सुनीता ने स्थानीय अफसरों के नंबरों पर लगातार फोन मिलाया, लेकिन साहब ने फोन उठाना अपनी शान के खिलाफ समझा। परेशान होकर जब उन्होंने फोन चेक किया तो वहां फ्यूज आफ काल को अटेंडेड दिखाया जा रहा था और शिकायत निराकरण का मैसेज भेज दिया गया।
