पश्चिम एशिया युद्ध के वैश्विक असर से घरेलू बाजार में पेट्रोलियम कंपनियों ने मई महीने में ही पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 10 रुपये की भारी बढ़ोतर …और पढ़ें

HighLights
- ईंधन की मार से बचने को EV बने पहली पसंद
- ढाई महीने में बिके 6,532 इलेक्ट्रिक वाहन
- एथेनॉल ब्लेंडिंग से भी परेशान हैं वाहन चालक
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। पश्चिम एशिया युद्ध के वैश्विक असर से घरेलू बाजार में पेट्रोलियम कंपनियों ने मई महीने में ही पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 10 रुपये की भारी बढ़ोतरी कर दी। इस अचानक आई महंगाई का असर शहर सहित पूरे जिले के ऑटोमोबाइल मार्केट पर दिखने लगा है। महंगे ईंधन की मार से बचने के लिए शहरवासियों का रुझान तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बढ़ा है, जिससे बाजार में इनकी डिमांड में उछाल आया है।
इलेक्ट्रिक वाहनों की रिकॉर्ड बिक्री
इस वित्तीय वर्ष में महज ढाई महीने के भीतर, यानी एक अप्रैल से लेकर 20 जून के बीच ही शहर में रिकॉर्ड 6,532 इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री हो चुकी है। यदि इसकी तुलना पिछले साल की समान अवधि से की जाए, तो पिछले वर्ष इस दौरान महज 2,490 इलेक्ट्रिक वाहन ही बिके थे। इस तरह पिछले साल के मुकाबले इस बार ईवी की बिक्री में ढाई गुना से भी ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
सिर्फ महंगाई नहीं, एथेनॉल ब्लेंडिंग भी बनी बड़ी वजह
ऑटोमोबाइल सेक्टर के बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, इलेक्ट्रिक वाहनों की इस कदर बढ़ती बिक्री के पीछे सिर्फ पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें ही इकलौता कारण नहीं हैं। सरकार द्वारा पेट्रोल में एथेनॉल की मिक्सिंग को बढ़ावा देना भी इसकी एक मुख्य वजह बन रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पेट्रोल में एथेनॉल मिक्स होने के कारण पुरानी और कई नई कार व बाइकों के इंजन पर विपरीत असर पड़ रहा है। लगातार एथेनॉल मिश्रित ईंधन के इस्तेमाल से वाहनों का माइलेज ड्रॉप हो रहा है और इंजन में तकनीकी खराबी की शिकायतें आ रही हैं। यही वजह है कि वाहन चालक अब पारंपरिक ईंधन वाले वाहनों को छोड़कर सुरक्षित और आधुनिक इलेक्ट्रिक वाहनों को तरजीह दे रहे हैं।
कम लागत और मजबूत होता इंफ्रास्ट्रक्चर
इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर जनता के झुकाव की दो अन्य महत्वपूर्ण वजहें हैं चलाने की बेहद कम लागत और बढ़ता हुआ इंफ्रास्ट्रक्चर। पेट्रोल-डीजल गाड़ियों की तुलना में इलेक्ट्रिक वाहन चलाने में बेहद सस्ते पड़ते हैं, जिससे नौकरीपेशा और आम उपभोक्ताओं का मासिक बजट नहीं बिगड़ता। इसके साथ ही, अब शहर सहित पूरे देश में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशनों का नेटवर्क तेजी से विकसित हो रहा है।
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इस तरह समझें इलेक्ट्रिक वाहनों की डिमांड को
| वाहन कटेगरी | बिक्री 2026 (1 अप्रैल से 20 जून) | बिक्री 2025 (1 अप्रैल से 20 जून) |
| इलेक्ट्रिक | 6532 | 2490 |
| पेट्रोल ई-20 | 5325 | 7874 |
| पेट्रोल-सीएनजी | 1109 | 873 |
| डीजल | 1421 | 1350 |
पिछले दो से तीन महीने में इलेक्ट्रिक वाहनों की डिमांड व पूछताछ बढी है। साथ ही बिक्री भी। डीजल-पेट्रोल की बढ़ती कीमतें व फ्यूल आदि काे लेकर लोग इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर रुख कर रहे हैं। चूंकि इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग का इंफ्रास्ट्रक्चर भी डवलप होता जा रहा है। इसलिए भी डिमांड बढ़ती जा रही है। हरिकांत समाधिया, अध्यक्ष, आटोमोबाइल एसोसिएशन
