नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। गजराराजा मेडिकल कालेज और जया आरोग्य अस्पताल के कायाकल्प और विकास के नाम पर मास्टर प्लान का ढिंढोरा पीटकर वाहवाही लूटने वाले कालेज प्रबंधन को तगड़ा झटका लगा है। स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल 700 करोड़ रुपये के मास्टर प्लान पर लाल स्याही लगाकर चले गए। अब कालेज प्रबंधन को यह पूरा तामझाम नए सिरे से तैयार करना होगा। इस बड़े प्रशासनिक गतिरोध के पीछे बिल्डिंग डिजाइन कंसल्टेंट (बीडीसी) की लापरवाही और अफसरों की अनदेखी सामने आई है, जिन्होंने बिना जमीनी हकीकत देखे कागजों पर करोड़ों की बर्बादी का खाका खींच दिया था।

कंसल्टेंट की टीम ने कालेज और अस्पताल के विकास का जो नक्शा और मास्टर प्लान तैयार किया था, उसमें अस्पताल परिसर की कई ऐसी इमारतों को भी ध्वस्त (तोड़ने) करने का प्रस्ताव शामिल कर दिया गया था, जो महज कुछ साल पहले ही करोड़ों रुपये की लागत से बनकर खड़ी हुई हैं। हद तो तब हो गई जब कालेज प्रबंधन इस आत्मघाती प्लान को शासन से सैद्धांतिक मंजूरी मिलने का दावा ठोक अपनी पीठ थपथपाने में लगा था।

डिप्टी सीएम के निर्देशों को भी कंसल्टेंट ने हवा में उड़ाया

इस 700 करोड़ के प्लान को उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला भी देख चुके थे। उन्होंने इस मास्टर प्लान में कुछ आवश्यक सुधार और संशोधन के निर्देश दिए थे। बीडीसी टीम ने दावा भी किया था कि उन्होंने डिप्टी सीएम के निर्देशों के तहत सुधार कर लिया है, लेकिन जब अपर मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल ने इस प्लान की समीक्षा की, तो वे इस गंभीर गड़बड़ी को ताड़ गए। उन्होंने प्लान पर कड़ी टिप्पणी करते हुए इसे सिरे से खारिज कर दिया और नए सिरे से रीडिजाइन करने के निर्देश जारी कर दिए।

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सवालों के घेरे में कालेज प्रबंधन

इस पूरे मामले ने मेडिकल कालेज प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

आखिर किस आधार पर कार्डियोलाजी भवन को तोड़ने का प्रस्ताव तैयार होने दिया गया।

क्या कालेज के जिम्मेदार अधिकारियों ने आंखें मूंदकर कंसल्टेंट की रिपोर्ट पर दस्तखत किए थे।

जीआरएमसी के प्रवक्ता ने कहा…

बीते रोज समीक्षा बैठक में अपर मुख्य सचिव ने प्लान को नए सिरे से तैयार करने के निर्देश दिए हैं। विभागाध्यक्षों की सहमति के बाद प्लान तैयार कर शासन को भेजा जाएगा। डॉक्टर केपी रंजन, प्रवक्ता, जीआरएमसी।



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